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Karauli: 300 मीटर नीचे पहुंचा पानी, किसान बोले 10 HP तक के सोलर पंप पर मिले अनुदान

करौली में गिरते भूजल स्तर ने किसानों की सिंचाई की चिंता बढ़ा दी है। कुसुम योजना में अभी 7.5 HP तक सोलर पंप पर अनुदान मिलता है, लेकिन कई इलाकों में 300 मीटर गहराई तक पानी मिलने से किसान 10 HP पंप पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं।

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एक खेत में सोलर पंप से आता पानी। फोटो। पत्रिका

करौली। किसानों को महंगे ईंधन से छुटकारा दिलाकर खेतों को सोलर ऊर्जा से सिंचित करने की योजना को कम होता भूजल स्तर प्रभावित कर रहा है। विभाग ने सोलर पंपों पर अनुदान देने के लिए जितनी गहराई के मापदंड तय कर रखे वे भूजल स्तर में कमी से नाकाफी साबित हो रहे है। सोलर पंपों की क्षमता भूजल स्तर की गहराई के मुकाबले कम है। ऐसे में किसानों को सरकार की ओर से तय मापदंडों से अधिक क्षमता से सोलर पंप लगाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

स्वीकृति साढ़े सात की, जरूरत दस एचपी तक

सरकार ने साढ़े सात एचपी तक क्षमता के सोलर पंप लगाने पर अनुदान देने की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन भूमिगत जल स्तर की गिरावट को देखते हुए कम से कम दस एचपी तक के सोलर पंप लगाने की आवश्यकता है। ताकि अधिक गहराई से आसानी से पानी खींचा जा सके और सिंचाई बेहतर हो सके। सूत्रों के अनुसार दस एचपी तक के सोलर पंप भी सामान्यतया 300 मीटर तक ही पानी खींचने की क्षमता रखते हैं, जबकि जिले में जल स्तर डांग सहित अन्य कई जगहों पर इससे कहीं कम गहराई में मिलता है।, लेकिन जहां तीन सौ मीटर तक पानी मिल सकता है वहां दस एचपी क्षमता के सोलर पंप से सिंचाई का कार्य आसानी से हो सकता है।

पत्रावली निरस्त होने की रहती आशंका

सोलर पंपों पर अनुदान के लिए किसान पत्रावली लगाते हैं, लेकिन उनके संबंधित इलाके में भूमि में पानी 100 से 150 मीटर से अधिक गहराई में मिलने पर पत्रावली निरस्त होने की आशंका बनी रहती हैं। ऐसे में उनको अनुदान का लाभ नहीं मिल पाता। करौली में टोडाभीम व हिण्डौन क्षेत्र के इलाकों में भी 300 या इससे अधिक मीटर तक गहराई में नलकूप लगवाने पर पानी मिल रहा है।

एक्सपर्ट व्यू

साढ़े सात से बढ़ाकर यदि दस एचपी तक के सोलर पंपों पर अनुदान की व्यवस्था हो जाए तो और बेहतर तरीके से सिंचाई में सुविधा हो सकती है। जिससे किसानों को लाभ मिलेगा।

वीडी शर्मा, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग

यह है योजना

केंद्र सरकार की कुसुम योजना के तहत सोलर ऊर्जा से चलने वाले पंपों से सिंचाई के लिए अनुदान दिया जाता है। जिसमें अधिकतम लागत 4.33 लाख की तुलना में किसानों को 2.28 लाख रुपए तक का अनुदान देय है। लेकिन भूमि जल स्तर में आ रही कमी के चलते इतनी लागत में लगने वाले सोलर पंपों की क्षमता पर्याप्त नहीं होने से वे अधिक गहराई से भूमि से जलस्तर खींचने में सक्षम नहीं रहते।

ऐसे में अधिक क्षमता से सोलर पंप लगने पर किसानों को बेहतर लाभमिल सकता है, लेकिन सरकार ने अमूमन 100-150 मीटर गहराई तक ही पानी खींचने की क्षमता वाले सोलर पंपों पर अनुदान देने की स्वीकृति दे रखी है, जबकि आवश्यकता इससे अधिक क्षमता वाले सोलर पंप लगाने की है। जिससे अधिक गहराई से पानी खींचा जा सके।

सोलर पंपों की क्षमता भी बढ़नी चाहिए

भूजल स्तर में हर वर्ष गिरावट आ रही है। ऐसे में सोलर पंपों की क्षमता भी बढ़नी चाहिए। जिससे किसान आसानी से सिंचाई कर सकें।
-हरिप्रसाद मीणा, आमलीपुरा, गुढ़ाचन्द्रजी

भूजल स्तर में कमी के चलते अधिक क्षमता के सोलर पंप लगवाने की स्वीकृति मिलनी चाहिए।
-राजाराम मीना, एकट, सपोटरा

इलाको में 300 मीटर गहराई तक पानी

भूमिगत जल स्तर कम होने पर अधिक क्षमता के सोलर पंप लगाने की आवश्यकता रहती है। ऐसे में दस एचपी तक की स्वीकृती मिले तो किसानों को और बेहतर लाभ मिल सकता है। टोडाभीम और हिण्डौन क्षेत्र के इलाको में 300 मीटर गहराई तक पानी मिलने लगा है।
-चेतराम मीना, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग