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Rajasthan: फर्जी दिव्यांगता के आधार पर 12 साल से नौकरी कर रहा शिक्षक गिरफ्तार, जांच में खुली पोल

राजस्थान में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में झालावाड़ जिले के एक शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं भरतपुर जिले का निवासी एक शिक्षक फरार हो गया है।

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गिरफ्तार शिक्षक बने सिंह (फोटो-पत्रिका)

झालावाड़। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में झालावाड़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ शिक्षक को गिरफ्तार किया है। विशेष जांच में सामने आया कि जिस दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर आरोपी ने नौकरी प्राप्त की थी, वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता था। मेडिकल बोर्ड की पुनः जांच में उसकी दिव्यांगता निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई। मामले में एक अन्य शिक्षक की तलाश जारी है।

जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने संबंधी गोपनीय शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। इन शिकायतों की जांच जिला पुलिस की ओर से विशेष अभियान के तहत शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

यहां देखें वीडियो :

40 की जगह 6 प्रतिशत मिली दिव्यांगता

पुलिस ने शिकायतों के सत्यापन के लिए आरोपित कर्मचारियों का बायोमैट्रिक सत्यापन कराया तथा संभाग स्तरीय एमबीएस अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा से विशेष मेडिकल बोर्ड गठित कर पुनः चिकित्सकीय परीक्षण करवाया। जांच में सामने आया कि दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना आवश्यक है, लेकिन आरोपी बनेसिंह की दिव्यांगता मात्र 6 प्रतिशत पाई गई। वहीं दूसरे आरोपी योगेश कुमार की दिव्यांगता शून्य प्रतिशत पाई गई। इसके बाद दोनों को दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए अपात्र माना गया।

जांच में हुए खुलासे

जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। पुलिस ने चिकित्सा विभाग से जारी मूल दिव्यांग प्रमाण पत्र, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में प्रस्तुत आवेदन पत्रों, परीक्षा परिणामों, नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया। जांच में प्रथम दृष्टया प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग और गलत जानकारी के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के साक्ष्य सामने आए।

कोर्ट ने 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

पुलिस ने 3 जून को आरोपी बनेसिंह (35) निवासी राकड़ा, तहसील अकलेरा को गिरफ्तार कर लिया। वह वर्तमान में बकानी ब्लॉक स्थित राजकीय मॉडल स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक (गणित) के पद पर कार्यरत है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

एक शिक्षक फरार

मामले में दूसरा आरोपी योगेश कुमार, जो भरतपुर जिले का निवासी और भवानीमंडी क्षेत्र के एक राजकीय विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक है, फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम रवाना कर दी गई है।

और नाम सामने आने की संभावना

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और संभावना है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी प्राप्त करने वाले अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई प्रदेशभर में दिव्यांग आरक्षण के दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।