# झालावाड़

सूंघने की ताकत से अपराधियों तक पहुंचती पुलिस, लेकिन झालावाड़ में नहीं है अपना डॉग स्क्वायडहत्या

पराधियों के सुराग कई बार आंखों से नहीं बल्कि सूंघने से मिलते हैं। पुलिस में “खामोश फोर्स” कहलाने वाला डॉग स्क्वायड आज भी झालावाड़ जिले में मौजूद नहीं है। हत्या, चोरी, डकैती और मादक पदार्थ तस्करी जैसे मामलों में पुलिस को हर बार कोटा से श्वान दल बुलाना पड़ता

2 min read
झालावाड़ डॉग स्क्वायड

-चोरी की गुत्थियों से लेकर ड्रग तस्करी तक, हर बड़े केस में खल रही खोजी श्वानों की कमी

हरि सिंह गुर्जर

झालावाड़। अपराधियों के सुराग कई बार आंखों से नहीं बल्कि सूंघने से मिलते हैं। पुलिस में “खामोश फोर्स” कहलाने वाला डॉग स्क्वायड आज भी झालावाड़ जिले में मौजूद नहीं है। हत्या, चोरी, डकैती और मादक पदार्थ तस्करी जैसे मामलों में पुलिस को हर बार कोटा से श्वान दल बुलाना पड़ता है, तब तक घटनास्थल के कई अहम सुराग मिट चुके होते हैं और अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर निकल जाते हैं।

जिले में बढ़ते अपराधों के बीच अपना डॉग स्क्वायड नहीं होना स्थानीय पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। चोरी और ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे अहम माने जाते हैं, लेकिन कोटा से टीम पहुंचने में लगने वाला समय जांच की रफ्तार धीमी कर देता है। कई बार अपराध स्थल पर मौजूद गंध, पैरों के निशान और अन्य संकेत खत्म हो जाते हैं।

सारोला और मनोहरथाना क्षेत्र के आंवलहेड़ा में हुई बड़ी चोरियों का अब तक खुलासा नहीं हो सका। इन वारदातों में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और बदमाश मोबाइल तक साथ नहीं लाए थे। ऐसे में पुलिस के पास तकनीकी सुराग बेहद सीमित रहे। यदि समय रहते खोजी डॉग स्क्वायड पहुंच जाता तो बदमाशों के आने-जाने के रास्ते और संभावित ठिकानों तक पहुंचना आसान हो सकता था।

ड्रग तस्करी का रूट बन रहे इलाके

भालता और भवानीमंडी क्षेत्र मादक पदार्थ तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बनते जा रहे हैं। ट्रेन मार्ग होने के कारण तस्कर आसानी से आवाजाही कर रहे हैं। जिले में लगातार मादक पदार्थ तस्कर पकड़े जा रहे हैं, लेकिन नारकोटिक डिटेक्टर डॉग्स की मदद मिले तो ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना और आसान हो सकता है।

ऐसे मदद करते हैं खोजी श्वान

पुलिस के प्रशिक्षित श्वान अपराधियों की गंध पकड़कर उनके भागने का रास्ता तलाश सकते हैं। ये नशीले पदार्थ, विस्फोटक और छिपाए गए सामान तक सूंघकर खोज निकालते हैं। कई बार जहां तकनीक और सीसीटीवी फेल हो जाते हैं, वहां डॉग स्क्वायड जांच की सबसे मजबूत कड़ी बन जाता है।

जिले में इसलिए जरूरत

  • चोरी और ब्लाइंड मर्डर के मामलों में सुराग जुटाने में मदद
  • मादक पदार्थ तस्करी पर लगाम लगाने में उपयोगी
  • संदिग्ध मौत और लापता मामलों में तेज जांच
  • अपराध स्थल से तुरंत ट्रैकिंग संभव डॉग स्क्वॉड के प्रमुख प्रकार
  • ट्रैकर डॉग्स : अपराधियों का पीछा करने और रास्ता तलाशने में माहिर।
  • बम डिटेक्टर डॉग्स : विस्फोटक और बारूदी सामग्री खोजने में उपयोगी।
  • नारकोटिक डॉग्स : अफीम, हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थ पकड़ने के लिए प्रशिक्षित।
  • सर्च एंड रेस्क्यू डॉग्स : आपदा या लापता लोगों की तलाश में मददगार।
  • गार्ड डॉग्स : सुरक्षा और गश्त के दौरान इस्तेमाल किए जाते हैं।

अपराधों को देखते हुए जिले में डॉग स्क्वायड की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में इससे काफी मदद मिल सकती है। मुख्यालय से प्रस्ताव मांगे जाने पर भेजा जाएगा।

- अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक झालावाड़