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बरसात में बच्चों की परीक्षा, 565 स्कूल और 1126 आंगनबाड़ी भवन जर्जर

जिले में 565 स्कूल भवन ऐसे हैं, जिन्हें मरम्मत की आवश्यकता है। इनमें बरसात के दौरान छतों से पानी टपकने की समस्या बनी रहती है, वहीं 1126 आंगनबाड़ी केंद्र भी मरम्मत की बाट जोह रहे हैं

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जिले के अकलेरा कस्बे में पिछले बारिश में महात्मा गांधी स्कूल में भरा पानी।

झालावाड़। जिले में मानसून आने वाला है। जिले में बड़ी संख्या में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की जर्जर हालत एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। बारिश के दौरान इन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की छतों से पानी टपकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उनके जीवन पर भी खतरा मंडराने लगता है। कई स्थानों पर पानी भरने और असुरक्षित रास्तों के कारण बच्चों का स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।

जिले में 565 स्कूल भवन ऐसे हैं, जिन्हें मरम्मत की आवश्यकता है। इनमें बरसात के दौरान छतों से पानी टपकने की समस्या बनी रहती है, वहीं 1126 आंगनबाड़ी केंद्र भी मरम्मत की बाट जोह रहे हैं। इनमें 472 केंद्र पिछले वर्ष की बारिश में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि 654 केंद्र जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। ऐसे भवनों में छोटे बच्चों को बि ठाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

हर बारिश में जलमग्न हो जाते हैं स्कूल

खानपुर ब्लॉक का राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल गोलाना हर वर्ष उजाड़ नदी में पानी आने पर आंशिक रूप से जलमग्न हो जाता है। नदी का पानी बढ़ने पर स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी बंद हो जाता है। इसी तरह अकलेरा ब्लॉक स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रमजानपुरा भी बारिश के दौरान जलभराव की चपेट में आ जाता है। ऐसे हालात में विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही प्रभावित होती है। जिले में ऐसे कई विद्यालय हैं, जहां हर वर्ष यही स्थिति बनती है।

उप स्वास्थ्य केंद्र भी जर्जर

रटलाई क्षेत्र की ग्राम पंचायत देवरी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। भवन की दीवारों और छतों में कई जगह दरारें आ चुकी हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण मरीजों और चिकित्सा कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय और कस्बे की तीन आंगनबाड़ी केंद्रों को क्षतिग्रस्त घोषित किए जाने के बाद से उनका संचालन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे किया जा रहा है।

हल्की बारिश में भी टपकने लगती हैं छतें

पिड़ावा क्षेत्र के कई स्कूलों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कल्याणपुरा, दौलतपुरा, शेरपुर, बोलियाबारी, कराड़िया, सरखेड़ी और रामपुरिया सहित कई गांवों के स्कूल भवनों में हल्की बारिश के दौरान ही छतों से पानी टपकने लगता है। इससे कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता है और विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ती है।

वर्षों से बनी हुई है समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर वर्ष यही हालात बनते हैं। कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि बच्चों को मजबूरी में असुरक्षित भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

सरकार को कदम उठाने चाहिए-
बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। जर्जर भवन और असुरक्षित रास्ते उनके स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए खतरा हैं। सरकार को शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्राथमिकता से कदम उठाने चाहिए।


भारतसिंह, अभिभावक, झालावाड़

"जिले में जो आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर अथवा मरम्मत योग्य स्थिति में हैं, उनके प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेज दिए गए हैं। जो भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उनके लिए नए भवन निर्माण की प्रक्रिया की जाएगी। वहीं मरम्मत योग्य केंद्रों की मरम्मत किसी योजना के माध्यम से जल्द कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

रवीन्द्र कुमार मीणा, कार्यवाहक उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, झालावाड़

"जिले में अत्यधिक जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त कर दिया गया है। वर्तमान में करीब 700 स्कूल ऐसे हैं, जो जर्जर अथवा मरम्मत योग्य श्रेणी में हैं। जिन विद्यालयों में मरम्मत की आवश्यकता है, उन्हें चिह्नित कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिए गए हैं। जिले के कुछ विद्यालय डूब क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे विद्यालयों को पूर्व में ही निर्देशित कर दिया गया है कि बारिश शुरू होने से पहले आवश्यक सामग्री एवं रिकॉर्ड सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर लें।

रामसिंह मीणा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, झालावाड़