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जयपुर में ₹184.30 करोड़ के OTS फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JDA के आदेश को बताया अवैध

Rajasthan Highcourt Order:राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए द्वारा जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित ओटीएस चौराहे के सौंदर्गीकरण और फ्लाईओवर निर्माण से जुड़े 184.30 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का ठेका निरस्त करने के फैसले को अवैध और असंवैधानिक ठहराया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

Update On JDA OTS Flyover Project: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को बड़ा झटका देते हुए जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित ओटीएस चौराहे के सौंदर्यीकरण और फ्लाईओवर निर्माण से जुड़े 184.30 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का ठेका निरस्त करने के फैसले को अवैध और असंवैधानिक करार दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओटीएस फ्लाईओवर का निर्माण अब पुराने कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ही किया जाएगा और जेडीए की ओर से की गई एकतरफा कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं थी।

न्यायाधीश समीर जैन की एकलपीठ ने इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य में सरकार बदलने या प्रशासनिक प्राथमिकताओं में परिवर्तन होने मात्र से कोई सरकारी संस्था कानूनी रूप से बाध्यकारी अनुबंध से एकतरफा पीछे नहीं हट सकती। अदालत ने माना कि जेडीए यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि ठेका रद्द करना किसी सार्वजनिक हित में आवश्यक था या इससे जनता को कोई विशेष लाभ मिलने वाला था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सत्ता परिवर्तन के आधार पर लिए गए ऐसे फैसले संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त समानता और निष्पक्षता के अधिकार के विपरीत हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी वैध अनुबंध को केवल प्रशासनिक सोच या प्राथमिकताओं के बदलाव के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, जेडीए ने वर्ष 2021-22 की बजटीय घोषणा के तहत ओटीएस चौराहे को सिग्नल-फ्री बनाने के उद्देश्य से ईपीसी मोड पर निविदा जारी की थी। इसके तहत 14 दिसंबर 2022 को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी किया गया और जनवरी 2023 से निर्माण कार्य शुरू हो गया। परियोजना को पूरा करने की मूल समय-सीमा 5 जनवरी 2024 निर्धारित की गई थी।

बाद में जेडीए ने बिना किसी जुर्माने के परियोजना की अवधि बढ़ाकर 30 अप्रैल 2024 तक कर दी। हालांकि, निर्धारित अवधि समाप्त होने से कुछ दिन पहले 24 अप्रैल 2024 को जेडीए ने एक पत्र जारी कर पूरा ठेका एकतरफा वापस ले लिया। इसके बाद 3 अप्रैल 2025 को प्राधिकरण ने इसी फ्लाईओवर परियोजना के लिए नई डीपीआर तैयार कराने और आगे की प्रक्रिया के लिए नई निविदा जारी कर दी।

जेडीए की इस कार्रवाई को याचिकाकर्ता कंपनी ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने जेडीए के फैसले को अवैध ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया कि परियोजना का निर्माण पूर्व में किए गए अनुबंध के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाएगा।