Business Reforms: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राजस्थान की बड़ी छलांग, जयपुर बना निवेश स्वीकृतियों का केंद्र। डी-रेग्यूलेशन फेज-1 के सकारात्मक नतीजे, प्रदेश में बढ़ा निवेशकों का भरोसा।
Ease of Doing Business: जयपुर. राजस्थान सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। 'डी-रेग्यूलेशन फेज-1' के तहत राज्य में निवेश प्रस्तावों के निस्तारण और स्वीकृतियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्य सचिव कार्यालय के अधीन गठित डिरेगुलेशन सेल द्वारा जारी अप्रैल 2026 की मासिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार राज निवेश पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के त्वरित निस्तारण ने राजस्थान को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल माह में राज निवेश पोर्टल पर कुल 9,010 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 6,103 आवेदनों को मंजूरी प्रदान की गई। इस प्रकार प्रदेश की कुल स्वीकृति दर 67.7 प्रतिशत रही, जो निवेश प्रक्रियाओं में बढ़ती दक्षता और प्रशासनिक सुधारों को दर्शाती है। राज्य सरकार द्वारा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि सरकार निवेश प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज निवेश पोर्टल के माध्यम से बड़े औद्योगिक केंद्रों के साथ-साथ छोटे जिलों में भी निवेश प्रस्तावों का प्रभावी निस्तारण किया जा रहा है। निवेशकों के साथ सतत संवाद, समन्वय और विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन की रणनीति ने राज्य को निवेश के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
जिला-वार प्रदर्शन में जयपुर सबसे आगे रहा। राजधानी में अप्रैल माह के दौरान 1,932 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,351 को स्वीकृति मिली। इसके अलावा जोधपुर, सीकर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, हनुमानगढ़, अलवर, चूरू और भीलवाड़ा जैसे जिलों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। निस्तारण दक्षता के मामले में कोटा और हनुमानगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमशः 83.8 प्रतिशत और 82.5 प्रतिशत स्वीकृति दर दर्ज की। वहीं बारां, चित्तौड़गढ़, टोंक, उदयपुर, जालोर और भीलवाड़ा सहित कई जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक स्वीकृति दर दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा आयुष, एग्रो-प्रोसेसिंग, रक्षा और शिक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में सर्वाधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें जयपुर, उदयपुर, पाली, राजसमंद और सीकर का विशेष योगदान रहा। इसके अतिरिक्त अलवर और कोटपूतली-बहरोड़ में इंजीनियरिंग, विभिन्न जिलों में नवीकरणीय ऊर्जा, अजमेर और भीलवाड़ा में वेस्ट मैनेजमेंट तथा जोधपुर में टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डी-रेग्यूलेशन फेज-1 के तहत प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित स्वीकृति प्रणाली ने राजस्थान को देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।