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Asha Bhosle: आशा भोसले के दिल में रह गई थी एक कसक.. क्या कभी पूरी हुई? राजस्थान के समाजसेवी ने सुनाई 22 साल पुरानी बात

Asha Bhosle: आशा भोसले के जीवन से जुड़ी एक पुरानी याद आज फिर ताजा हो गई है, जो न सिर्फ उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है, बल्कि उनके दिल में छिपी एक अधूरी कसक को भी सामने लाती है। यह बात तब पता चली, जब पाली निवासी समाजसेवी करीब 22 साल पहले उनसे मुलाकात किए थे।

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फाइल फोटो- सोशल मीडिया

जयपुर। आशा भोसले का नाम भारतीय संगीत की उन महान आवाजों में शामिल है, जिनकी गूंज पीढ़ियों तक सुनाई देती रहेगी। हजारों गीतों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली आशा ताई सिर्फ एक गायिका ही नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनके जीवन से जुड़ी एक याद पाली के समाजसेवी नेमीचंद चौपड़ा आज भी सहेजे हुए हैं, जो उनके दिल में छिपी एक अनकही कसक को उजागर करती है।

करीब 22 साल पहले, 2003-2004 के दौरान पाली निवासी अखिल भारतीय जैन कॉन्फ्रेंस के संरक्षक नेमीचंद चौपड़ा किसी काम से मुंबई गए थे। वहीं जुहू क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उनकी मुलाकात महान गायिका लता मंगेशकर और आशा भोसले से हुई। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें उनके साथ उनके निवास पर जाने और भोजन करने का अवसर मिला। इसी दौरान करीब एक घंटे तक चली बातचीत ने चौपड़ा के मन में गहरी छाप छोड़ दी।

समाजसेवी नेमीचंद चौपड़ा (फोटो-पत्रिका)

आशा भोसले ने कही थी दिल को छूने वाली बात

बातचीत के दौरान जब आशा भोसले को नेमीचंद चौपड़ा के सामाजिक कार्यों के बारे में पता चला, तो वे काफी प्रभावित हुईं। जरूरतमंदों और जीवों की सेवा के प्रति उनका समर्पण सुनकर आशा ने एक सादा लेकिन दिल को छू लेने वाली बात कही- 'आप लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करते हैं, यह बहुत बड़ा काम है… ऐसा मैं नहीं कर सकती।' यह वाक्य केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उनके भीतर की उस भावना का संकेत था, जिसमें सेवा करने की इच्छा तो थी, लेकिन उसे अपने जीवन में उतार पाने की एक कसक भी छिपी थी।

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चौपड़ा ने दिया था जवाब

चौपड़ा ने उन्हें जवाब दिया कि उनका संगीत ही समाज की सेवा का एक अद्भुत माध्यम है। उनके गाए भजन और गीत लोगों के मन में संस्कार, भक्ति और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप छोड़ते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी सेवा है, जो लाखों लोगों तक पहुंचती है।

फिर दोबारा नहीं हुई वैसी मुलाकात

वर्षों बाद भी वह मुलाकात नेमीचंद चौपड़ा के लिए खास बनी हुई है। वे बताते हैं कि बाद में कई बार कार्यक्रमों में आशा ताई से मुलाकात हुई, लेकिन उस एक घंटे की आत्मीय बातचीत जैसी निकटता फिर कभी महसूस नहीं हुई। आज उन्हें इस बात का अफसोस भी है कि उस समय उन्होंने कोई तस्वीर नहीं ली, जो उस याद को एक स्थायी रूप दे पाती।

दिल में छुपी थी संवेदना

नेमीचंद चौपड़ा की मुलाकात से पता चलता है कि आशा ताई एक महान कलाकार के साथ मानवीय संवेदना की झलक भी थीं। आशा भोसले ने अपने संगीत से समाज को बहुत कुछ दिया, लेकिन उनके दिल में कहीं न कहीं सेवा के उस सीधे रास्ते को न अपना पाने की एक हल्की सी टीस हमेशा रही, जो उन्हें और भी ज्यादा इंसानी और करीब बना देती है।