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Cold Water Side Effects: गर्मी में एक सांस में ठंडा पानी पीना कितना सही? नेफ्रोलॉजिस्ट ने बताए शरीर पर पड़ने वाले असर

Cold Water Effects: गर्मी में फ्रिज का ठंडा पानी एक ही बार में पीना शरीर को थर्मल शॉक दे सकता है। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. निशा गौर से जानिए इसका पाचन, किडनी और हार्ट रेट पर क्या असर पड़ सकता है।

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ठंडा पानी पीते हुए व्यक्ति को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

Summer Hydration Tips: गर्मियों के सीजन में चिलचिलाती धूप और लू से राहत पाने के लिए लोग अक्सर घर आते ही फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी ढूंढते हैं। तेज प्यास लगने पर एक ही सांस में पूरा गिलास या बोतल खाली कर देना एक आम आदत बन चुकी है। लेकिन क्या अचानक और एक सांस में बहुत ठंडा पानी पीना मेडिकल साइंस के नजरिए से सही है?

नेफ्रोलॉजिस्ट के अनुसार, अत्यधिक ठंडा पानी एक सांस में गटकना आपके शरीर के इंटरनल मैकेनिज्म, किडनी और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के लिए एक बड़ा शॉक (झटका) साबित हो सकता है। आइए क्लिनिकल दृष्टिकोण से समझते हैं कि यह आदत शरीर पर क्या असर डालती है।

एक सांस में ठंडा पानी पीने से शरीर पर क्या होता है?

जब आप बहुत ठंडा पानी तेजी से पीते हैं, तो शरीर को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:

  • वेगस नर्व (Vagus Nerve) पर शॉक: गले के पीछे से होकर गुजरने वाली वेगस नर्व शरीर के ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम और हार्ट रेट को कंट्रोल करती है। जब अत्यधिक ठंडा पानी एक झटके में इसके संपर्क में आता है, तो यह नर्व अचानक स्टिम्युलेट हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप हार्ट रेट (दिल की धड़कन) अचानक कम हो सकती है, जिससे चक्कर आना या बेहोशी जैसी स्थिति बन सकती है।
  • थर्मल शॉक (Thermal Shock): मानव शरीर का आंतरिक तापमान (Core Body Temperature) लगभग 37°C होता है। जब अचानक 4°C से 10°C का पानी पेट में जाता है, तो शरीर को थर्मल शॉक लगता है। रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) तुरंत सिकुड़ जाती हैं, जिससे उस हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है।
  • पाचन क्रिया का ठप होना: पेट की रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से पाचन प्रक्रिया (Digestion) कमजोर पड़ जाती है। पेट को भोजन या तरल पदार्थों को प्रोसेस करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिससे पेट में ऐंठन, दर्द या ब्लोटिंग हो सकती है।

पानी पीने का सही क्लिनिकल तरीका

नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. निशा गौर बताती हैं कि पानी केवल प्यास बुझाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और किडनी फंक्शन को सीधे प्रभावित करता है।

"अत्यधिक ठंडा पानी एक सांस में पीने से शरीर का फ्लूइड रेगुलेशन प्रभावित होता है। जब आप तेजी से पानी घटकते हैं, तो वह सीधे पेट में जाकर गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरता है और आंतों की दीवारों पर दबाव बनाता है। इससे शरीर पानी को सही तरीके से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता। क्लिनिकल रूप से पानी पीने का सबसे सही तरीका है घूंट-घूंट करके (Sip-bySip) और बैठकर पानी पीना। जब आप धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो मुंह की लार (Saliva) पानी के साथ मिलकर पेट के एसिडिक एनवायरनमेंट को न्यूट्रलाइज करती है और किडनी पर अचानक एक्स्ट्रा फ्लूइड लोड नहीं पड़ता।"

किडनी और लिक्विड बैलेंस पर असर

किडनी का मुख्य काम शरीर से टॉक्सिन्स को फिल्टर करना और पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटेशियम) का संतुलन बनाए रखना है। डॉ. निशा गौर के मुताबिक, जब पानी धीरे-धीरे शरीर में जाता है, तो किडनी उसे बेहतर तरीके से प्रोसेस कर पाती है। इसके विपरीत, अचानक बहुत सारा पानी पीने से खून का वॉल्यूम तेजी से बढ़ता है, जिससे किडनी पर अचानक प्रेशर आता है और वह सारा पानी यूरिन के रास्ते बाहर निकाल देती है, जिससे सेल्स का हाइड्रेशन ठीक से नहीं हो पाता।

एक्सपर्ट की सलाह: क्या करें?

फ्रिज के चिल्ड वाटर के बजाय घड़े या मटके का पानी पिएं। इसका तापमान शरीर के अनुकूल होता है।

धूप से आने के बाद कम से कम 5-10 मिनट बैठें, शरीर का तापमान सामान्य होने दें, फिर सामान्य पानी पिएं।

खड़े होकर एक सांस में पानी पीने के बजाय आराम से बैठकर छोटे-छोटे घूंट में पानी पिएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।