Blood Cancer Early Symptoms: क्लीवलैंड क्लिनिक पर प्रकाशिथ एक शोध के अनुसार, लगातार बुखार, कमजोरी और खून की कमी ब्लड कैंसर का संकेत हो संकेत हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि ये 3 लक्षण क्यों दिखाई देते हैं।
Blood Cancer Early Symptoms: क्या शरीर में रहने वाली मामूली सी थकावट या बार-बार आने वाला हल्का बुखार किसी बड़े अंदरूनी बदलाव का संकेत हो सकता है? क्लीवलैंड क्लिनिक में प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, लगातार बुखार रहना, हर वक्त कमजोरी महसूस होना और शरीर में खून की कमी होना, ब्लड कैंसर के शुरुआती वैज्ञानिक लक्षण हैं। आइए जानते हैं कि ब्लड कैंसर के अन्य लक्षण क्या-क्या होते हैं।
नेचर जर्नल के अनुसार, ब्लड कैंसर की शुरुआत हमारे शरीर के बोन मैरो (Bone Marrow) से होती है। बोन मैरो हमारी हड्डियों के बीच का वह खोखला और स्पंजी हिस्सा होता है, जहां नए ब्लड सेल्स (रक्त कोशिकाएं) बनते हैं। जब किसी व्यक्ति को ब्लड कैंसर की शिकायत होती है, तो इस हिस्से में एक खास किस्म का जेनेटिक म्यूटेशन (डीएनए में खराबी) होने लगता है।
इस खराबी की वजह से शरीर में असामान्य और कैंसर ग्रस्त सफेद रक्त कोशिकाएं (Abnormal White Blood Cells) बहुत तेजी से और बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं। ये खराब कोशिकाएं इतनी ज्यादा हो जाती हैं कि ये स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) और प्लेटलेट्स को बनने ही नहीं देतीं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ब्लड कैंसर के ये लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें हफ्तों तक पहचान ही नहीं पाते। अगर ये लक्षण 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार बने रहें, तो सजग हो जाना चाहिए।
1. लगातार या बार-बार बुखार आना- क्योंकि कैंसर कोशिकाएं शरीर की असली रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को खत्म कर देती हैं, इसलिए शरीर किसी भी सामान्य इन्फेक्शन से नहीं लड़ पाता और लगातार बुखार बना रहता है।
2. हर वक्त कमजोरी और थकावट- जब बोन मैरो में खराब सेल्स भर जाते हैं, तो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स कम हो जाते हैं। ऑक्सीजन की इसी कमी के कारण शरीर हर वक्त थका हुआ महसूस करता है।
3. खून की कमी (एनीमिया)- लाल रक्त कोशिकाओं के लगातार घटने से शरीर में खून का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे त्वचा पीली पड़ने लगती है और सांस फूलने की समस्या होने लगती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।