भारत, Jun 06, 2026

बहुत ज्यादा थकी हुई युवती की प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Magnesium Deficiency Symptoms: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि बैठे-बैठे अचानक दिल की धड़कन तेज हो जाती है या बिना बात के घबराहट होने लगती है? या फिर रात को सोते समय अचानक पैर की नस पर नस चढ़ जाती है और आप दर्द से छटपटा उठते हैं? अक्सर हम लोग इन सब बातों को मामूली थकान या कमजोरी समझकर छोड़ देते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ये छोटे-छोटे इशारे बताते हैं कि आपके शरीर में मैग्नीशियम (Magnesium) की कमी हो गई है। आइए समझते हैं कि हाइपोमैग्नेसीमिया क्या होता है और शरीर में इसकी कमी को कौनसे लक्षणों से पहचाना जा सकता है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, जब हमारे शरीर में मैग्नीशियम का संतुलन बिगड़ जाता है तो वो स्थिति हाइपोमैग्नेसीमिया कहलाती है। मैग्नीशियम हमारे शरीर के अंदर होने वाले छोटे-बड़े कई कामों को संभालता है,जैसे हड्डियों को मजबूत रखना, शरीर की नसों को ठीक से चलाना, ब्लड प्रेशर को काबू में रखना और दिमाग को शांत रखना। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो हमारे शरीर का पूरा का पूरा सिस्टम थोड़ा डगमगा जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, अगर आपके शरीर में मैग्नीशियम का लेवल घट रहा है, तो आपको ये परेशानियां देखने को मिल सकती हैं;
1.पैर की नस चढ़ना या अकड़न- अगर सोते समय या बैठे-बैठे अचानक आपके पैर, पिंडली या हाथों की नसें खिंच जाती हैं और तेज दर्द होता है, तो समझ जाइए कि शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो सकती है।
2. लगातार सिरदर्द या माइग्रेन रहना- जिन लोगों को अक्सर सिर में दर्द रहता है या माइग्रेन की शिकायत है, उनके शरीर में भी कई बार मैग्नीशियम कम पाया जाता है। यह नसों को आराम देता है, और इसके न होने से नसें सिकुड़ने लगती हैं जिससे सिर फटने लगता है।
3. हर समय सुस्ती और थकान- रात को पूरी नींद लेने के बाद भी अगर आप सुबह उठकर थका-थका सा महसूस करते हैं और शरीर में बिल्कुल जान नहीं लगती, तो यह भी एक बड़ा इशारा हो सकता है।
4. नींद न आने की बीमारी- जब शरीर में मैग्नीशियम कम होता है, तो हमारा दिमाग और शरीर पूरी तरह रिलैक्स (शांत) नहीं हो पाते। इस वजह से रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी काफी देर तक नींद नहीं आती और करवटें बदलनी पड़ती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
संबंधित विषय:
Published on: 06 Jun 2026 04:10 pm

कोई कमेंट नहीं है।
पहले कमेंट करने वाले बनें।