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Dholpur: पंजीकरण ना जांच…कैसे तय होगी आरओ सेंटरों के पानी की शुद्धता

धौलपुर. आरओ यानी फिल्टर पानी के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। प्लांट संचालक लोगों को जो पानी उपलब्ध करा रहे हैं वह मानक रूप से सही है या नहीं इसकी कभी जिम्मेदार जांच तक नहीं करते। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सेंटरों के संचालन में नियमों की भी पालना नहीं की जा रही।

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धौलपुर. आरओ यानी फिल्टर पानी के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। प्लांट संचालक लोगों को जो पानी उपलब्ध करा रहे हैं वह मानक रूप से सही है या नहीं इसकी कभी जिम्मेदार जांच तक नहीं करते। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सेंटरों के संचालन में नियमों की भी पालना नहीं की जा रही। अधिकतर के पास किसी भी प्रकार का कोई पंजीकरण तक नहीं है। देखा जाए तो यह कैसे तय होगा कि आरओ के नाम पर शहरवासी जो पानी पी रहे हैं वह मानकों के आधार पर शुद्ध है?

समय परिवर्तन और नलों में आने वाले गंदे पानी के कारण शहर से लेकर जिले भर में आरओ प्लांटों की बाढ़ सी आ गई है। अकेले शहर में ही ३० से ३५ आरओ प्लांटों का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा है। जहां फिल्टर पानी के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है। भीषण गर्मी में इन प्लांटों से पानी की सप्लाई 4 गुना तक बढ़ गई है और प्रतिदिन लगभग ६० से ७० हजार लीटर पानी की सप्लाई शहर भर में की जा रही है। सवाल यह है कि पानी का कारोबार करने वाले अधिकांश लोग बिना लाइसेंस के ही लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। इनके पास पानी की गुणवत्ता जांच के लिए संयंत्र भी उपलब्ध नहीं है। तो वहीं जहां बिना लाइसेंस और बीआईएस मानकों की अनदेखी कर यह अवैध आरओ प्लांट अमानक पानी बेचकर स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बने हुए हैं। देखा जाए तो व्यावसायिक रूप से पानी बेचने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडड्र्स और खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस अनिवार्य है, लेकिन कमाई के चक्कर में कई संचालक नियमों को ताक पर रख रहे हैं, तो वहीं जिम्मेदार विभागों के जिम्मेदार भी इन अवैध सेंटरों पर कार्रवाई करने से कतराते हैं।

पानी जांच के लिए लैब तक नहीं

नियमानुसार व्यावसायिक रूप से पीने का पानी (पैक्ड या जार) बेचने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का पंजीकरण या लाइसेंस अनिवार्य रूप से जरूरी होता है। तो वहीं बोतलबंद पानी की बिक्री के लिए बीआईएस की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करना भी आवश्यक है। इसके अलावा नगरीय निकाय से भी प्लांट संचालन की अनुमति लेनी होती है। लेकिन शहर में संचालित अधिकतर आरओ प्लांटों पर किसी भी प्रकार का कोई पंजीकरण नहीं है। इसके अलावा प्लांट संचालकों ने पानी जांच के लिए लैब तक नहीं खोली है। पानी की बिना जांच किए हुए सप्लाई किया जा रहा है।

शहर में 30 से 35 आरओ प्लांट संचालित

आरओ पानी का कारोबार धीरे-धीरे पैर पासरने लगा है। हालांकि इस कारोबार के संचालन को लेकर बहुत सारे मानक पूर्ण करने होते हैं, लेकिन शहर में इन मानकों का दरकिनार कर प्लांटों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है यही कारण है कि अब यह धंधा कमाई का जरिया बन गया है। शहर भर में ही 30 से 35 आरओ सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। जहां से प्र्रतिदिन आरओ के नाम से 50 से 60 हजार लीटर पानी सप्लाई घरों, दुकानों, सरकारी कार्यालयों सहित निजी ऑफिसों में किया जा रहा है। एक पानी की 20 रुपए में बेची जा रही है तो वहीं ठण्डे पानी की केन के संचालक 30 से 40 रुपए तक वसूल रहे हैं।

साफ-सफाई का भी नहीं देते ध्यान

संचालक पंजीकरण सहित अन्य मानकों को तो ठेंगा दिखा ही रहे हैं वहीं इन प्लांटों पर पर्याप्त साफ-सफाई तक की कोई व्यवस्था नहीं होती। गंदगी के बीच ही पानी के केम्परों को भरा जाता है। ऐसे में जो पानी घरों में बॉटल या केंपरों से सप्लाई किया जा रहा है वो कितना सुरक्षित है इसकी जांच पड़ताल करने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि कई प्लांट की हालत तो इतना खराब है कि यहां गंदगी का ढेर लगे रहते है। इसलिए आरओ प्लांट की जांच होना आवश्यक है। इन प्लांट में पानी कैसे शुद्ध किया जा रहा है अथवा नहीं, इसकी जांच किसी भी जिम्मेदार विभाग कभी नहीं करता।संचालन को यह जरूरी

- व्यावसायिक पंजीकरण

- खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण लाइसेंस

- भारतीय मानक ब्यूरो प्रमाणन

- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अनापत्ति प्रमाण पत्र

- भूजल निकासी अनुमति

- विद्युत कनेक्शन

क्या बोले एक्सपर्ट...

प्रदूषित पानी पीने से होने वाले नुकसान को लेकर फिजीशियन डॉ. दीपक जिंदल ने बताया कि दूषित पानी से डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और टाइफाइड का खतरा बढ़ता है। तो वहीं पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम खत्म होने से हड्डियां और जोड़ कमजोर होने लगते हैं। घर पर पानी का टीडीएस नियमित रूप से चेक करें। पीने के पानी का टीडीएस 100 से 300 के बीच बेहतर माना जाता है।

शहर में संचालित फिल्टर पानी सेंटरों से समय-समय पर पानी जांच के नमूने लेकर कार्रवाई की जाती है। हमारे यहां से आरओ सेंटर संचालन का लाइसेंस जारी किया जाता है।

-पदम सिंह परमार, खाद्य निरीक्षक