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ट्विशा केस: सास गिरिबाला के जवाबों से संतुष्ट नहीं CBI, हर सवाल का एक जवाब- ‘आरोप निराधार’

Twisha Sharma Death Case: टि्वशा शर्मा केस में सीबीआई जांच जारी है। टि्वशा की मौत को लेकर सास गिरिबाला सिंह के जवाबों से सीबीआई संतुष्ट नहीं है....

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Twisha Sharma Death Case: (Photo Source - Patrika)

Twisha Sharma Case Updates:एमपी के भोपाल शहर में सबसे चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में लगातार सीबीआई जांच कर रही है। ट्विशा की संदिग्ध मौत को 19 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर उस रात हुआ क्या था। सीबीआइ ने आरोपी पति समर्थ सिंह और पूर्व जज सास गिरि बाला सिंह को 2 जून तक रिमांड पर लिया है और लगातार पूछताछ जारी है। जांच के तीसरे दिन रविवार को सीबीआइ का पूरा फोकस गिरिबाला सिंह पर रहा। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान कई सवालों पर उनके जवाब जांच एजेंसी को संतुष्ट नहीं कर सके।

सवालों का बस एक जवाब- आरोप निराधार हैं…

बता दें कि रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह दोनों पांच दिनों की पुलिस हिरासत में है। ऐसे में सीबीआई दोनों से पूछताछ कर इस बाता का पता लगाने में जुटी है कि शादी के पांच महीनों में ट्विशा के साथ क्या-क्या हुआ और 12 मई को उसकी मौत कैसे हुई। गिरिबाला सिंह से भी पूछा गया कि ट्विशा और समर्थ के रिश्ते कैसे थे। साथ उसकी प्रेग्नेंसी और डिप्रेशन तक, कई सवाल पूछे गए। बताया जा रहा है कि इस दौरान गिरिबाला सिंह थोड़ी बेचैन नजर आई और कई सवालों पर चुप्पी साधे रखी।

पूछताछ के दौरान सीबीआई ने एफआईआर में दर्ज आरोपों और उनकी भूमिका पर स्पष्टीकरण मांगा। एजेंसी ने पूछा कि शिकायतकर्ता पक्ष के गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी भूमिका सीमित क्यों मानी जाए? ट्रायल कोर्ट द्वारा केस डायरी, गवाहों के बयान और मृतका के परिजनों के आरोपों पर विचार किए जाने को लेकर भी सवाल किए गए। सूत्रों के मुताबिक, गिरिबाला सिंह ने आरोपों को निराधार बताया और गर्भपात के बाद अवसाद के कारण ट्विशा द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की आशंका जताई। वे हर प्रश्न का जवाब आरोप निराधार हैं…ही दे रही हैं।

सवालों के घेरे में ये बिंदु प्रमुख

-ट्विशा के शरीर पर मिले चोटों के निशान कैसे आए ?
-घटना के बाद घर के भीतर क्या-क्या गतिविधियां हुईं?
-सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड क्या कहानी बता रहे हैं?
-क्या क्राइम सीन में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई?
-एसआइटी जांच के दौरान किन स्तरों पर चूक हुई?
-घटना की सूचना मिलने से लेकर पुलिस कार्रवाई तक क्या-क्या हुआ?

34 मिनट की वीडियोग्राफी अहम साक्ष्य

मामले में एक नया और महत्वपूर्ण पहलू आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की ओर से बनाई गई 34 मिनट की वीडियोग्राफी है। यह वीडियो उस समय का है, जब गिरिबाला सिंह के घर का ताला खोला गया था और घटनास्थल को सील किया गया था। सीबीआई ने इस वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जब्त किया है।

बता दें कि इस वीडियो की वीडियोग्राफी खुद आरक्षक ने की है जिसे सीबीआई ने सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य के रूप में जब्त किया है। वीडियो में घटना के बाद आरोपी सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर का ताला खुलने से लेकर घटनास्थल सील होने तक का पूरा सीन रिकॉर्ड है। इस वीडियो से सीबीआई को ये समझने में मदद मिली कि ट्विशा की मौत के तुरंत बाद घर या क्राइम सीन की स्थिति को बिलकुल वैसा समझने में मदद मिली जैसा वह वास्तव या यथार्थ में था। इसमें साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं बची।

पूर्व जज की तबीयत बिगड़ी

पूछताछ के दौरान गिरि बाला सिंह ने घबराहट, बेचैनी और एंग्जाइटी की शिकायत सीबीआई से की है। रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। जांच एजेंसी इससे जुड़े सभी पहलुओं को भी रिकॉर्ड में ले रही है। जानकारी मिली है कि महिला डीसीपी स्तर की अधिकारी उनसे लगातार सवाल-जवाब कर रही है।

3 दिन भोपाल में छिपा था समर्थ

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि पत्नी की मौत का केस दर्ज होने के बाद आरोपी समर्थ सिंह तुरंत नहीं भागा था। वह कुछ दिनों तक भोपाल में ही रुका रहा। पहले कहा गया था कि समर्थ सिंह, जबलपुर भाग गया था लेकिन ऐसा नहीं है। सीबीआई अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भोपाल में ही रुककर वह केस के संबंध में जानकारियां लेते रहा, अपने बचाव की तरीके और साधन जुटाता रहा। करीब तीन दिन बाद समर्थ भोपाल छोड़कर जबलपुर गया था। पुलिस ने उसे वहीं से गिरफ़्तार किया था। 12 मई से लेकर गिरफ़्तारी तक आरोपी समर्थ सिंह के मददगारों के संबंध में सीबीआई जानकारी जुटाने के लिए हर जतन कर रही है।

बता दें कि जहां आरोपी समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी रहीं वहीं वह खुद भी क्रिमीनल लायर था। इतना ही नहीं, वह मध्यप्रदेश सरकार का कानूनी सलाहकार भी रह चुका है। ऐसे में प्रदेशभर के अनेक रसूखदारों, राजनेताओं, वकीलों और न्यायिक अधिकारियों से पूरे परिवार के गहरे संबंध हैं।