# भोपाल

ट्विशा केस: FIR दर्ज होने के बाद कई दिन राजधानी में ही रहा समर्थ, तुरंत नहीं भागा, सीबीआई का खुलासा

Samarth Singh- अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भोपाल में ही रुककर केस के संबंध में जानकारियां लेते रहा, अपने बचाव की तरीके और साधन जुटाता रहा।

2 min read
Samarth stayed in Bhopal for a few days following the registration of the FIR in the Twisha case

Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा डेथ केस में एक बड़ा खुलासा हुआ है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार पत्नी की मौत का केस दर्ज होने के बाद आरोपी समर्थ सिंह तुरंत नहीं भागा था। वह कुछ दिनों तक राजधानी में ही रुका रहा। पहले कहा गया था कि समर्थ सिंह, जबलपुर भाग गया था लेकिन ऐसा नहीं है। सीबीआई अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भोपाल में ही रुककर वह केस के संबंध में जानकारियां लेते रहा, अपने बचाव की तरीके और साधन जुटाता रहा। 12 मई से लेकर गिरफ़्तारी तक आरोपी समर्थ सिंह के मददगारों के संबंध में सीबीआई जानकारी जुटाने के लिए हर जतन कर रही है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ट्विशा शर्मा डेथ केस की हर गुत्थी सुलझाने की कोशिश कर रही है हालांकि मामला अभी पूरी तरह साफ नहीं हो सका है। सीबीआई का पूरा जोर अब इस बात का पता लगाने पर है कि ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई! केस को पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने किसी प्रकार से प्रभावित तो नहीं किया! यदि ऐसा किया तो क्या और किसकी मदद से यह काम किया!

सीबीआई को ट्विशा केस में एक अहम जानकारी हाथ लगी है। जांच अधिकारियों के अनुसार मुख्य आरोपी समर्थ सिंह, पत्नी की मौत के तुरंत बाद फरार नहीं हुआ जैसा पूर्व की रिपोर्टों में कहा जा रहा था। वह कुछ दिनों तक भोपाल में ही रुका। केस का अपडेट लेता रहा, अपने बचाव की कोशिश करता रहा।

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी भोपाल में ही रुका रहा

सूत्रों के अनुसार जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार आरोपी पति समर्थ सिंह अपनी पत्नी की संदिग्ध मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी भोपाल में ही रुका रहा था। कुछ दिन की फरारी यहीं काटी। करीब तीन दिन बाद समर्थ भोपाल छोड़ कर जबलपुर गया था। पुलिस ने उसे वहीं से गिरफ़्तार किया था।

प्रदेशभर के रसूखदारों, वकीलों और न्यायिक अधिकारियों से गहरे संबंध

बता दें कि जहां आरोपी समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी रहीं वहीं वह खुद भी क्रिमीनल लायर था। इतना ही नहीं, वह मध्यप्रदेश सरकार का कानूनी सलाहकार भी रह चुका है। ऐसे में प्रदेशभर के अनेक रसूखदारों, राजनेताओं, वकीलों और न्यायिक अधिकारियों से पूरे परिवार के गहरे संबंध हैं। इस विषमकाल में समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह ने उनसे सहायता की अपेक्षा की ही होगी। यह कितनी उचित या अनुचित थी, सीबीआई ही इसकी पड़ताल करेगी।