Rajneesh Agrawal- पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन नितिन तक रजनीश अग्रवाल के मुरीद, बीजेपी के बूथ प्रबंधन को दिया नया कलेवर
Rajayasabha Chunav- भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश से अपने राज्यसभा प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा जिन दो उम्मीदवारों की घोषणा की गई है उनमें पंजाब के बीजेपी नेता तरुण चुघ के साथ मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल का नाम भी शामिल है। मूलत: सागर के रहनेवाले अग्रवाल पार्टी में पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सीएम मोहन यादव सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने शुभकामनाएं व्यक्त कीं। खास बात यह है कि रजनीश अग्रवाल को पीएम नरेंद्र मोदी भी एक्स पर फॉलो करते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ भी वे युवा मोर्चा में काम कर चुके हैं। दोनों की ऐसी जबर्दस्त बॉन्डिंग है कि रजनीश अग्रवाल ने नबीन से अपनी शादी में घोड़ी पर चढ़ाने आने की बात कही। नितिन नबीन ने इसे निभाया भी।
चुनावों के 2 साल पहले से ही प्रदेशभर में बीजेपी के बूथ प्रबंधन को दिया नया कलेवर
रजनीश अग्रवाल लंबे समय से प्रदेश संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनावों की बीजेपी की जबर्दस्त जीत के शिल्पकारों में उनका नाम भी शामिल है। चुनावों के 2 साल पहले से ही रजनीश अग्रवाल ने प्रदेशभर में बीजेपी के बूथ प्रबंधन को नया कलेवर देने का काम चालू कर दिया था।
बीजेपी ने रजनीश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाकर संगठन को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा होता है। रजनीश अग्रवाल का व्यक्तित्व कुछ ऐसा है कि प्रदेश बीजेपी के ज्यादातर नेता उनपर काफी भरोसा करते हैं।
रजनीश अग्रवाल मूलत: आरएसएस से हैं। संघ की तर्ज पर बिल्कुल लो प्रोफाइल स्टाइल में काम करते हैं।
आरएसएस और बीजेपी के सभी बड़े नेताओं से उनकी बहुत अच्छी बॉन्डिंग है।
जनहित के मुद्दों को हमेशा ध्यान में रखते हैं। पार्टी नेताओं को इनसे अवगत कराते रहते हैं।
बीजेपी में रजनीश अग्रवाल की संगठन और प्रबंधन में बेहद कुशल नेता की पहचान है। वे कभी सुर्खियों में नहीं रहे पर अपने इस गुण की वजह से शुरु से ही टॉप लीडरशिप की नजर में बने रहे।
शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। तभी से जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़कर असल मुद्दों को परखने और उनपर काम करने की कला सीखी।