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जहरीली हुई थाली, भोपाल में हर सीजन में उड़ेल रहे ढाई लाख लीटर कीटनाशक

Pesticides- रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी, फसल को स्वस्थ रखने वाले कीट हो रहे खत्म, 50 करोड़ रुपए के कीटनाशक

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250000 liters of pesticide being sprayed every season in Bhopal

Bhopal Foods- भोपाल में भोजन की थाली लगातार जहरीली होती जा रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिले की जो फसलें आपकी थाली में रोटी, दाल, चावल या अन्य किसी रूप में परोसी जा रहीं हैं, उनमें एक ही सीजन में ढाई लाख लीटर कीटनाशक खपाया जा रहा है। करीब 50 करोड़ रुपए के कीटनाशक शत्रु कीट के साथ मित्र कीट को भी खत्म कर देते हैं। ऐसे में आपकी थाली हेल्थी कैसे बनी रहेगी? ये बड़ा सवाल तेजी से चिंता बढ़ा रहा है।

डेढ़ लाख हेक्टेयर में कीटनाशक:

जिले का कुल बोया जाने वाला कृषि क्षेत्र 1.5 लाख हेक्टेयर है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति हेक्टेयर तकनीकी श्रेणी के कीटनाशकों की औसत खपत लगभग 1.300 लीटर तक पहुंच गई है। सामान्य स्थिति में ये 300 ग्राम तक रहती है।

भोपाल क्षेत्र में सोयाबीन और चने जैसी फसलों पर कीटों का हमला अधिक होता है, इसलिए लिक्विड और पाउडर फॉर्मूलेशन को मिलाकर खपत बढ़ाकर उपयोग की जाती है। सामान्य और सस्ते कीटनाशक मोनोक्रोटोफॉस, क्लोरपायरीफॉस, नीम ऑयल के साथ डिनोटेफुरान, साइक्लुथ्रिन कीट नाशकों का उपयोग तेजी से किया जा रहा है।

मित्र कीटों को बचाना चाहिए

रिटायर्ड कृषि वैज्ञानिक एमएस वर्मा का कहना है कि मित्र कीटों को बचाना चाहिए। उनके अनुसार केंचुए मिट्टी को खाकर उसे बेहद उपजाऊ बनाते हैं। मिट्टी में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया और माइकोराइजा जैसे फंगस पौधों को हवा से नाइट्रोजन और जमीन से फास्फोरस सोखने में मदद करते हैं। लेडीबर्ड बीटल फसलों का रस चूसने वाले खतरनाक कीटों को खाता है। ड्रैगनफ़्लाई और डे्सेलफ़्लाई हवा में उड़ते हुए फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक पतंगों, मच्छरों और मक्खियों का शिकार करते हैं।

जैविक खेती के भी प्रयोग

पिछले कुछ समय से जिले के फंदा और बैरसिया ब्लॉक में कृषि विभाग द्वारा एकीकृत कीट प्रबंधन और जैविक दवाओं जैसे नीम का तेल और गोमूत्र से बनी दवाओं के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इससे रासायनिक दवाओं की मात्रा में धीरे-धीरे कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जमीन की उपजाऊ क्षमता बची रहे।

केमिस्ट्री के प्रोफेसर आनंद शर्मा के अनुसार, मिट्टी में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया फसलों की वृद्धि, पोषक तत्वों के चक्र और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन और कार्बन जैसे तत्वों के प्राकृतिक चक्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं। अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से इन लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या घट सकती है।