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Giral Mines Protest : ‘अब तक कहां थे?’, BJP MLA आदूराम मेघवाल पर फूटा मृतक श्रमिक के पिता का गुस्सा, गरमाया माहौल

बाड़मेर के गिरल आंदोलन में धरने पर बैठे श्रमिक जैसाराम मेघवाल के निधन से माहौल गरमाया। मोर्चरी के बाहर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।

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मृतक के पिता के साथ एमएलए आदूराम मेघवाल

राजस्थान के बाड़मेर जिले में औद्योगिक नीति, स्थानीय रोजगार और पुनर्वास की मांगों को लेकर लंबे समय से चल रहा 'गिरल आंदोलन' एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद में बदल गया है। गिरल लिग्नाइट परियोजना क्षेत्र के पास अपनी मांगों को लेकर बेमियादी धरने पर बैठे एक स्थानीय श्रमिक जैसाराम मेघवाल के निधन के बाद माहौल अचानक गरमा गया है। जैसाराम की मृत्यु की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में आंदोलनकारी, ग्रामीण और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता बाड़मेर के जिला अस्पताल परिसर में जुटना शुरू हो गए। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से मृतक श्रमिक के शव को तुरंत जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख नेता और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं, जिससे मोर्चरी के बाहर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं।

BJP MLA को बुजुर्ग पिता ने सुनाई खरी-खोटी

श्रमिक जैसाराम मेघवाल के असामयिक निधन की खबर मिलते ही सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेता और चौहटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक आदूराम मेघवाल पीड़ित परिवार से मिलने और उन्हें ढांढस बंधवाने के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही विधायक मोर्चरी के बाहर खड़े ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे, वहां मौजूद लोगों और विशेष रूप से मृतक श्रमिक के बुजुर्ग पिता का गुस्सा फूट पड़ा।

मृतक जैसाराम मेघवाल के पिता ने बेहद भावुक और आक्रोशित होकर भाजपा विधायक आदूराम मेघवाल को सीधे तौर पर खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। बुजुर्ग पिता ने विधायक की तरफ देखते हुए तीखा और सीधा सवाल पूछा, “हम लोग अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले 2 महीने से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे थे। तब हमारी सुध लेने कोई नहीं आया। अब जब मेरा बेटा ही नहीं रहा, तब आप लोग यहां आए हो, कहां थे अब तक?” बुजुर्ग पिता के इस सवाल के बाद मोर्चरी के बाहर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

'नहीं देखी ऐसी हठधर्मिता वाली सरकार'

आंदोलनकारी ग्रामीणों और श्रमिक संगठनों का सीधा आरोप है कि जैसाराम मेघवाल की जान किसी सामान्य बीमारी से नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की घोर हठधर्मिता के कारण गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मजदूर पिछले 60 दिनों (2 महीने) से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन सरकार ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और वार्ता के जरिए मामले को नहीं सुलझाया।

मोर्चरी के बाहर मौजूद ग्रामीणों ने मीडिया और प्रशासन के सामने अपना आक्रोश जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में राजस्थान के भीतर कई तरह की सरकारें और प्रशासनिक व्यवस्थाएं देखी हैं, लेकिन मजदूरों और गरीबों के प्रति ऐसी संवेदनहीन और हठधर्मिता वाली सरकार पहले कभी नहीं देखी।

MLA रविंद्र सिंह भाटी भी पहुंचे मोर्चरी

इस संवेदनशील घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी तुरंत अपने समर्थकों के साथ जिला अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे। रविंद्र सिंह भाटी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और इस दुखद घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया। मोर्चरी के बाहर एक तरफ शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और दूसरी तरफ चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल की मौजूदगी के कारण मामला पूरी तरह से राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है।

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी इस मामले में स्थानीय श्रमिकों के हितों की रक्षा करने और जैसाराम मेघवाल के परिवार को न्याय दिलाने की बात कही है। मारवाड़ की राजनीति में युवाओं और किसानों के मुद्दों को प्रखरता से उठाने वाले जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण जिला प्रशासन पर अब चौतरफा दबाव बन गया है। दोनों विधायक मोर्चरी के बाहर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों से संवाद करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासनिक अमला मौके पर मुस्तैद

मामले की गंभीरता को देखते हुए बाड़मेर जिला कलेक्टर के निर्देश पर उच्च प्रशासनिक अधिकारी तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे। अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) राजेंद्र सिंह, गडरारोड के उपखंड अधिकारी (SDM) सुरेश कुमार तथा स्थानीय तहसीलदार हुक्मीचंद भारी पुलिस जाब्ते के साथ मोर्चरी के बाहर मुस्तैद हैं। अधिकारियों ने तुरंत आंदोलनकारी नेताओं और मृतक के परिजनों के साथ बंद कमरे में प्रारंभिक वार्ता शुरू की ताकि गतिरोध को समय रहते तोड़ा जा सके।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन हमेशा संवाद के लिए तैयार हैं। एडीएम राजेंद्र सिंह ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं और पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद ही नियमों के अनुसार जो भी सहायता राशि या मुआवजा तय है, उसे तुरंत जारी करने की अनुशंसा की जाएगी। हालांकि, ग्रामीण अभी भी किसी भी प्रकार के मौखिक आश्वासन को मानने को तैयार नहीं हैं और वे मौके पर ही अंतिम फैसले की मांग पर अड़े हुए हैं।