शहर में गंदगी से अटे नाले भ्रष्टाचार की कहानी कह रहे हैं। हर साल एक करोड़ रुपए नाला सफाई पर खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद भी नालों में कचरा भरा रहना इस बात को इंगित करता है कि सफाई के नाम का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। इस बार भी नालों के कचरे से अटे रहने की वजह से बारिश में जलभराव होगा।
मानसून की दस्तक से पहले जैसा हाल शहर के नालों का नजर आ रहा है, उसे देखकर लगता है कि इस बार भी शहर के ज्यादातर इलाके पानी में डूब जाएंगे। जनप्रतिनिधि और अधिकारी पिछले सालों में हुई जलभराव की समस्या से सबक नहीं ले रहे। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए इनमें से कोई भी गंभीर नहीं है। इनकी अभी तक कोई तैयारी नहीं है। शहर का ड्रेनेज सिस्टम बारिश को झेलने के लिए तैयार नहीं है। नालों की सफाई नहीं हो पाई है। सर्वाधिक जलभराव वाले इलाके स्वर्ग रोड, गायत्री मंदिर मार्ग, गोपाल टॉकीज मार्ग व चूड़ी मार्केट फिर से तालाब का रूप लेंगे।
राजस्थान पत्रिका ने मानसून की आवक से पहले शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पड़ताल की, तो सामने आया कि शहर के प्रमुख मार्गों के कई नालों की सफाई मिली। वार्डों से जुड़े नाले कचरे से अटे मिले। यदि अलवर नगर निगम के अफसरों की नींद नहीं टूटी, तो मानसून में लोगों को इस बार भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। यह हाल तो तब है जब नगर निगम हर नालों की सफाई पर एक करोड़ रुपए खर्च करता है। कई जगह नालों पर लगे जाल भी टूट गए, जिससे हादसे हो सकते हैं।
होप सर्कस, मुख्य बाजार, विवेकानंद सर्किल से बस स्टैंड, अशोक टॉकीज, मनु मार्ग, घंटाघर, एसएमडी सर्किल, काली मोरी के नीचे, गायत्री मंदिर मार्ग, चूड़ी बाजार, गोपाल टॉकीज, स्वर्ग रोड आदि जगहों पर जलभराव अधिक होता है।