# अलवर

लाखों पौधे लगाने के बाद भी क्यों तप रहा अलवर, 4 दशक में बढ़ा 2 डिग्री पारा

अलवर में पिछले चार दशकों में पारा 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। हर साल कागजों और जमीनों पर लाखों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देखरेख के अभाव में इनमें से सिर्फ 20 प्रतिशत पौधे ही जिंदा बच पाते हैं।

3 min read
कैसे न बढ़े ताप... शहर की एक बिल्डिंग में लगे AC (फोटो - पत्रिका)

अलवर शहर में बढ़ती गर्मी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर पिछले वर्षों में लगाए गए लाखों पौधे भी तापमान को कम करने में कारगर साबित क्यों नहीं हुए? क्या ये पौधे केवल कागजों में लगे या उचित रखरखाव के अभाव में सूखकर खत्म हो गए?

विशेषज्ञों के अनुसार 1980 के दशक में अलवर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंचता था जो अब बढ़कर 47 डिग्री तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के जंगल और बिना जलवायु अनुकूल योजना के विकसित हो रहे फ्लैट व आवासीय प्रोजेक्ट शहर को और गर्म बना रहे हैं। इससे बचने के लिए हीट एक्शन प्लान की भी जरूरत है, ताकि बढ़ती हीटवेव के खतरे को कम किया जा सके।

20 प्रतिशत पौधे ही बच पाते हैं

हरियाली बढ़ाने के लिए हर साल जिलेभर में लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। इस बार भी 41 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इनका सही तरीके से रखरखाव नहीं हो पाता है। यही वजह है कि केवल 20 प्रतिशत पौधे ही बच पाते हैं। अगर सभी पौधे बचा लिए जाते तो पिछले सालों में हुए पौधरोपण से हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकती थी।

जहां करनी थी हरियाली, वहां बसा दी आबादी, कैसे कम हो हीट

  • जोन बी के लिवारी एरिया के खसरा नंबर 780 का भू-उयोग रीजनल पार्क है, लेकिन यहां पहाड़ी पर आबादी है।
  • इसी एरिया के खसरा नंबर 474 में भी पहाड़ व प्लांटेशन की जगह पहाड़ी पर आबादी बसी है।
  • सोनावा डूंगरी के खसरा नंबर 42/193 ग्रीनरी होनी थी, लेकिन यहां आबादी बस गई। चोर डूंगरी के खसरा नंबर 19, 42, 43 में ग्रीनरी की जगह आबादी बस गई।
  • जोन-सी के बेलाका एरिया के खसरा नंबर 223, 224 में ग्रीनरी, तालाब की जगह आंशिक आबादी बस गई।
  • देवखेड़ा के खसरा नंबर 30 पर ग्रीनरी से ज्यादा आबादी बस गई।
  • देसूला में नहरी जमीन खसरा संख्या 180, 181, 185 व 186 पर है। यहां ग्रीनरी की जगह आबादी बस गई।
  • देसूला के खसरा संख्या 307 में भी ग्रीनरी की जगह आंशिक आबादी है।
  • जोन डी में नगला समावदी के खसरा संख्या 348, 349 व 351 पर हरियाली होनी थी, लेकिन यहां आबादी निवास कर रही है।

हीट अलर्ट के नाम पर लू तापघात वार्ड

प्रशासन के पास हीट के लिए एक्शन प्लान केवल यही है कि स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट करके अलग से लू तापघात वार्ड बनवाया जाता है। बारिश से पहले अलग-अलग एरिया में पौधरोपण होता है, लेकिन लगाए गए पौधे कितने जीवित हैं, इसका पता किसी को नहीं है। शहरीकरण के नाम पर लगातार अनियोजित विकास बढ़ रहा है। फ्लैट व आवासीय योजना में अपनाई जा रही तकनीक व कंक्रीट हीट बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं, इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्लान नहीं है। जल संरचनाएं जरूर दो साल से यहां बनाई जा रही हैं, लेकिन यह जीवित रहेंगी या नहीं, इसको लेकर जिम्मेदारी तय नहीं है।


हीट कम करने के लिए योजना जरूरी

  • अर्बन ग्रीन प्लान का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की निगरानी और घने हरित कॉरिडोर विकसित करने जरूरी हैं।
  • सरकारी भवनों, स्कूलों और नई आवासीय परियोजनाओं में हीट रिफ्लेक्टिव (सफेद या कूल) छतों को बढ़ावा देना होगा।
  • शहरी नियोजन में नए फ्लैट और कॉलोनियों की मंजूरी में पर्याप्त खुला क्षेत्र, पेड़ और वेंटिलेशन अनिवार्य करना होगा।
  • शहर के सबसे गर्म क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष हरित क्षेत्र विकसित करने होंगे।
  • तालाब, जोहड़ और जलाशयों को पुनर्जीवित कर स्थानीय तापमान संतुलित करना।
  • बस स्टैंड, बाजार और प्रमुख सड़कों पर शेड, पेड़ और पेयजल की व्यवस्था जरूरी है।
  • तापमान बढ़ने पर अलर्ट सिस्टम, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और जनजागरूकता अभियान चलाने जरूरी।

इस चेतावनी को गंभीरता से लेना होगा

पेड़ों का कटान, तालाब, कुएं, नहरों का सूखना, शहरीकरण को बढ़ावा। यह सभी तापमान में वृद्धि के कारण हैं। 80 के दशक में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंचता था। अप्रेल में गर्मी नहीं होती थी, लेकिन अब मार्च में ही तापमान 35 डिग्री से. के पार पहुंच जाता है। समय से पहले पेड़ों के फूल आ रहे हैं। खरपतवार बढ़ रहे हैं। फसलों का उत्पादन कम हो रहा है। तापमान 47 डिग्री तक पहुंच रहा है। यह सभी पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की ओर इशारा करते हैं। अगर शहरों की विकास योजनाओं में हरियाली, जल संरक्षण और ताप नियंत्रण को केंद्र में नहीं रखा गया, तो केवल पौधरोपण के आंकड़े बढ़ेंगे, लेकिन पारा भी लगातार चढ़ता रहेगा - आरएस शेखावत, पूर्व क्षेत्र निदेशक सरिस्का टाइगर रिजर्व