राजस्थान सरकार के 'वंदे गंगा' जल संरक्षण अभियान के तहत मंगलवार को अलवर के प्रसिद्ध मानसरोवर बांध पर एक विशेष जल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने बांध की पूजा की और पानी की हर बूंद को बचाने का संकल्प लिया।
अलवर जिले में पानी की किल्लत को दूर करने और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन और आम जनता ने मिलकर एक नई मुहिम की शुरुआत की है। राज्य सरकार के 'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान के तहत मंगलवार को जल संसाधन विभाग की ओर से ऐतिहासिक मानसरोवर बांध पर भव्य जल पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को पानी की कीमत समझाना और हमारे पारम्परिक जल स्रोतों को सहेजने के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ मानसरोवर बांध के जल की पूजा-अर्चना करके की गई। इस खास मौके पर जल संसाधन विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में आस-पास के गांवों के स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। जल पूजन के बाद वहां मौजूद सभी लोगों को जल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई गई। लोगों ने हाथ आगे बढ़ाकर यह कसम खाई कि वे न तो खुद पानी को बर्बाद करेंगे और न ही अपने आस-पास किसी को ऐसा करने देंगे।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने वर्तमान समय में गहराते जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पानी ही जीवन का असली आधार है। अगर हम आज सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इस दौरान वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) यानी बारिश के पानी को सहेजने, घरों में पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों और खेतों में ऐसी तकनीक अपनाएं जिससे पानी की कम से कम बर्बादी हो।
'वंदे गंगा' अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों में भी काफी उत्साह देखा गया। ग्रामीणों का कहना था कि मानसरोवर बांध इलाके की लाइफलाइन है और इसकी देखरेख करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक, इस अभियान को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आने वाले दिनों में अलवर के अन्य तालाबों, बावड़ियों और बांधों पर भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि जल संरक्षण एक जन आंदोलन बन सके। कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का भी संकल्प लिया गया।