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तिल कुटा चौथ पर चौथ माता की पूजा, महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य व सुख-समृद्धि की कामना

अलवर के सकट कस्बे के प्राचीन चौथ माता मंदिर में मंगलवार को माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर तिल कुटा चौथ व्रत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।

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सकट के प्राचीन चौथ माता मंदिर में पूजा-अर्चना करती महिलाएं (फोटो - पत्रिका)

अलवर के सकट कस्बे के प्राचीन चौथ माता मंदिर में मंगलवार को माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर तिल कुटा चौथ व्रत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने चौथ माता का पूजन कर अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सुबह से ही महिलाएं नए-नए परिधान धारण कर समूहों में भजन-कीर्तन गाती हुई मंदिर पहुंचीं, जिससे समूचा कस्बा धार्मिक वातावरण से सराबोर हो गया।

मंदिर के पुजारी पाराशर ने बताया कि व्रत के दौरान महिलाओं को सुव्यवस्थित रूप से कतार में खड़ा कर चौथ माता की प्रतिमा के दर्शन कराए गए। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चौथ माता की कथा सुनी और मंदिर परिसर व आसपास समूहों में बैठकर माता के भजनों का गायन किया। इस दौरान चौथ माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।


व्रतधारी महिलाओं ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया तथा घर की बुजुर्ग महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। देर रात चंद्र दर्शन के बाद चौथ माता को जल अर्पित कर व्रत का पारण किया गया। तिल कुटा चौथ के उपलक्ष्य में घर-घर विशेष पकवान बनाए गए और माता को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया गया।

इस अवसर पर कई महिला श्रद्धालुओं ने माता रानी को पोशाक, सिंगार सामग्री तथा बैंड-बाजों के साथ भेंट चढ़ाई। वहीं, अनेक महिलाओं ने मनोकामना पूर्ण होने पर व्रत का उद्यापन भी किया। मंदिर तक जाने वाले मार्गों पर प्रसाद, खिलौने, महिला श्रृंगार, खान-पान और घरेलू सामान की सैकड़ों दुकानें सजी रहीं, जहां महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की।

तिल कुटा चौथ पर चौथ माता के दर्शनों के लिए आसपास के गांवों व ढाणियों के साथ-साथ दिल्ली, जयपुर, अलवर, दौसा, राजगढ़, बांदीकुई, बसवा, टहला सहित अनेक स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वयंसेवकों द्वारा जगह-जगह जल की प्याऊ भी लगाई गई, जिससे सेवा और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला।

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