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सरिस्का में 6 से 8 फरवरी तक राष्ट्रीय स्तर की बाघ संरक्षण कार्यशाला

बाघ परियोजना सरिस्का, अलवर में 6 से 8 फरवरी तक भारत के टाइगर रिजर्व्स के क्षेत्र निदेशकों और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

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Sariska Tiger Reserve (Patrika Photo)

बाघ परियोजना सरिस्का, अलवर में 6 से 8 फरवरी तक भारत के टाइगर रिजर्व्स के क्षेत्र निदेशकों और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में देशभर के 58 टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक और 18 राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक भाग लेंगे। आयोजन को बाघ संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, राजस्थान सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा, भारत सरकार के महानिदेशक वन सहित केंद्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान रेस्क्यू के लिए तैयार किए गए रोडमैप और प्रोजेक्ट चीता की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया जाएगा।

तकनीकी सत्रों में मानव-बाघ संघर्ष, अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 तथा बाघ आबादी के सक्रिय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श और समीक्षा की जाएगी। इन चर्चाओं के माध्यम से बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर मंथन होगा।

कार्यशाला के दौरान 7 फरवरी को सिलीसेढ़ झील के रामसर साइट घोषित होने के उपलक्ष्य में वहीं बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। वहीं 8 फरवरी की सुबह अलवर टाइगर मैराथन आयोजित होगी, जिसका उद्देश्य आमजन में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह कार्यशाला देश में बाघ संरक्षण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीतियां तय करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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