अलवर, Jun 04, 2026

कैसे न बढ़े ताप... शहर की एक बिल्डिंग में लगे AC (फोटो - पत्रिका)
अलवर शहर में बढ़ती गर्मी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर पिछले वर्षों में लगाए गए लाखों पौधे भी तापमान को कम करने में कारगर साबित क्यों नहीं हुए? क्या ये पौधे केवल कागजों में लगे या उचित रखरखाव के अभाव में सूखकर खत्म हो गए?
विशेषज्ञों के अनुसार 1980 के दशक में अलवर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंचता था जो अब बढ़कर 47 डिग्री तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के जंगल और बिना जलवायु अनुकूल योजना के विकसित हो रहे फ्लैट व आवासीय प्रोजेक्ट शहर को और गर्म बना रहे हैं। इससे बचने के लिए हीट एक्शन प्लान की भी जरूरत है, ताकि बढ़ती हीटवेव के खतरे को कम किया जा सके।
हरियाली बढ़ाने के लिए हर साल जिलेभर में लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। इस बार भी 41 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इनका सही तरीके से रखरखाव नहीं हो पाता है। यही वजह है कि केवल 20 प्रतिशत पौधे ही बच पाते हैं। अगर सभी पौधे बचा लिए जाते तो पिछले सालों में हुए पौधरोपण से हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकती थी।
जहां करनी थी हरियाली, वहां बसा दी आबादी, कैसे कम हो हीट
प्रशासन के पास हीट के लिए एक्शन प्लान केवल यही है कि स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट करके अलग से लू तापघात वार्ड बनवाया जाता है। बारिश से पहले अलग-अलग एरिया में पौधरोपण होता है, लेकिन लगाए गए पौधे कितने जीवित हैं, इसका पता किसी को नहीं है। शहरीकरण के नाम पर लगातार अनियोजित विकास बढ़ रहा है। फ्लैट व आवासीय योजना में अपनाई जा रही तकनीक व कंक्रीट हीट बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं, इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्लान नहीं है। जल संरचनाएं जरूर दो साल से यहां बनाई जा रही हैं, लेकिन यह जीवित रहेंगी या नहीं, इसको लेकर जिम्मेदारी तय नहीं है।
पेड़ों का कटान, तालाब, कुएं, नहरों का सूखना, शहरीकरण को बढ़ावा। यह सभी तापमान में वृद्धि के कारण हैं। 80 के दशक में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंचता था। अप्रेल में गर्मी नहीं होती थी, लेकिन अब मार्च में ही तापमान 35 डिग्री से. के पार पहुंच जाता है। समय से पहले पेड़ों के फूल आ रहे हैं। खरपतवार बढ़ रहे हैं। फसलों का उत्पादन कम हो रहा है। तापमान 47 डिग्री तक पहुंच रहा है। यह सभी पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की ओर इशारा करते हैं। अगर शहरों की विकास योजनाओं में हरियाली, जल संरक्षण और ताप नियंत्रण को केंद्र में नहीं रखा गया, तो केवल पौधरोपण के आंकड़े बढ़ेंगे, लेकिन पारा भी लगातार चढ़ता रहेगा - आरएस शेखावत, पूर्व क्षेत्र निदेशक सरिस्का टाइगर रिजर्व
Published on: 04 Jun 2026 11:52 am

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