बांसवाड़ा, Jun 03, 2026

Photo: Patrika
Mango Crop Damage: बांसवाड़ा जिले में बीते दिनों आए तेज अंधड़-बारिश से आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिले में करीब 40 से 50 प्रतिशत कच्चे आम हवा के चलते पेड़ों से टूटकर गिर गए। इनमें से आधे आम अपरिपक्व और छोटे हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। अमूमन हर बार जून के मध्य माह तक मानसून सक्रिय होता है। इस बार अनुमान से पहले आए अंधड़ से जिले के 40 से 50 प्रतिशत आम पेड़ से टूटकर गिर गए। किसानों को अंधड़ के कारण भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
जिले में करीब 3200 हैक्टेयर क्षेत्र में आम के पौधे लगे हैं। ऑफ ईयर होने के चलते आम की पैदावार भी कम हैं और आम के झड़ने से पैदावार 50 प्रतिशत ही रह गई है। जिले में देशी सहित कलमी, दशहरी, मल्लिका, लंगड़ा और केसर, आम्रपाली आम की प्रमुख किस्में हैं। आमों के गिरने से इनमें कई में कट लग गया है तो कुछ पानी से गलकर दागदार हो गए हैं। आम यदि टूटकर नहीं गिरता तो आने वाले दिनों में और बड़ा होता, जिससे उसका वजन भी बढ़ता और किसानों को मंडी में भी अच्छा दाम मिलते।
कृषि अनुसंधान केंद्र के संभागीय निदेशक डाॅ. हरगिलास मीणा के अनुसार इस बार बोरवट के 6 हैक्टेयर में आम के पौधे लगाए गए। यहां लगे बगीचों में हर साल करीब 200 से 250 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। तेज हवाओं के चलते यहां भी करीब 65 से 70 क्विंटल आम टूटकर गिर गए हैं। इसके चलते आम का टेंडर लेने वाले ठेकेदार को भी नुकसान हुआ है। ठेकेदार शाहनबाज के अनुसार करीब 200 कैरेट आम टूटकर गिरे हैं, जिनका वजन 65 से 70 क्विंटल है।
कृषि अनुसंधान केंद्र में इस बार कुल 10 हैक्टेयर में 49 प्रकार की वैराटियाें के पौधे लगाए हैं। इनमें दस मुख्य प्रजातियों के आम के पेड़ अधिक हैं। इनमें बॉम्बे ग्रीन, चौसा, दशहरी, लंगड़ा, केसर, मल्लिका, नीलम, बजरंग आदि प्रजातियाें पर आम आ रहे हैं।
आम के पेड़ पर सीजन में साल में एक बार अधिक आम आते हैं, जिसे ऑन ईयर कहते हैं और दूसरी साल कम आम आते हैं, जिसे ऑफ ईयर कहते हैं। इस बार ऑफ ईयर के चलते पैदावार भी कम थी और तेज हवाओं से 40 से 50 प्रतिशत आम भी समय से पहले टूटकर गिर गया है, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
दल सिंह गरासिया, निदेशक उद्यान, बांसवाड़ा
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Published on: 03 Jun 2026 09:50 am

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