
फाइल फोटो पत्रिका
जयपुर। सांप्रदायिक दंगा मामलों की जयपुर स्थित विशेष अदालत ने 25 साल पहले (वर्ष 2000) मालपुरा में हुए दंगे के मामले में शुक्रवार को 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। मामले की पीठासीन अधिकारी श्वेता गुप्ता ने साक्ष्यों को अपूर्ण, संदेहास्पद, अविश्वसनीय एवं तथ्यों से परे मानते हुए टोंक जिले के मालपुरा निवासी राम प्रसाद, रतनलाल, रामस्वरूप, देवकरण, श्योजीराम, रामकिशोर, सुखलाल, छोटू, बच्छराज, किस्तूर, हीरालाल, सत्यनारायण, किशनलाल एवं एक अन्य किशनलाल को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
एडवोकेट वी.के. बाली एवं सोनल दाधीच ने आरोपियों की ओर से कहा कि पुलिस जांच में ऐसा एक भी तथ्य नहीं आया, जिससे आरोप प्रमाणित होता हो। एफआईआर दर्ज कराने वाले ने भी किसी अन्य की सूचना पर रिपोर्ट दर्ज कराई। कथित घटना के समय मौके पर धारा 144 लगी हुई थी। ऐसे में कथित चश्मदीद गवाहों की मौके पर उपस्थिति ही संदेहास्पद थी।
साक्ष्य से न तो घटनास्थल प्रमाणित हुआ और न ही इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद हुआ। आरोपियों के चेहरे ढके हुए होना बताए जाने के कारण किसी आरोपी की शिनाख्त परेड भी नहीं हुई। गांव में एक ही नाम के कई व्यक्ति होना और गवाहों के बयानों में विरोधाभास भी सामने आया। इस आधार पर सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आग्रह किया गया।
मालपुरा थाना क्षेत्र में 10 जुलाई, 2000 को सांप्रदायिक दंगे में 10 वर्षीय जुम्मा व 14 वर्षीय बंटी उर्फ ईशाक की हत्या हुई थी। इसको लेकर रिश्तेदार रूस्तम ने 11 जुलाई, 2000 को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि दोनों बच्चे जंगल में बकरियां चराने गए थे, जिनकी समुदाय विशेष के लोगों ने हत्या कर दी। अनुसंधान के बाद इस मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। इनमें से 5 को हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में ही डिस्चार्ज कर दिया एवं एक आरोपी को नाबालिग माना गया। इनके अलावा एक आरोपी की मौत हो चुकी है।
Published on:
28 Feb 2026 11:24 am
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