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Mahashivratri Special: राजस्थान के 600 साल पुराने इस चमत्कारी मंदिर में बाल रूप में विराजते हैं भोलेनाथ, जानिए इसकी खासियत

Jharneshwar Mahadev Mandir: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हम राजस्थान के एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां भगवान शिव बाल रूप में विराजमान हैं।

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अरावली पर्वतमाला के बीच में स्थित झरनेश्वर महादेव मंदिर। फोटोः जय माखीजा

Jharneshwar Mahadev Mandir: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हम राजस्थान के एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां भगवान शिव बाल रूप में विराजमान हैं। पहाड़ों और प्राकृतिक झरने के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है, जहां दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

यह मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले में अरावली पर्वतमाला के बीच में स्थित है। झरनेश्वर महादेव मंदिर करीब 600 साल पुराना है। यहां भोलेनाथ बालरूप में विराजमान है। पहाड़ से बरसाती झरना बहने के कारण इसका नाम झरनेश्वर रखा गया है।

जितनी बार पूजा, उतनी बार शृंगार

यहां दिन में जितनी बार महादेव की पूजा होती है। उतनी बार अलग-अलग शृंगार किया जाता है। यहां पूरे साल आता पानी कुण्ड में एकत्र होता है। कुण्ड का जलस्तर कम होने के बाद स्वत: ही ऊपर आ जाता है।

रोज सबसे पहले इसी मंदिर में होती है पूजा-अर्चना

आधा किलोमीटर पहाड़ी का रास्ता तय करने के बाद श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। अजमेर शहर में प्रतिदिन सर्वप्रथम इसी मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होती है। क्योंकि इस मंदिर में महादेव का बाल रूप है।

सम्राट पृथ्वीराज यहां आकर करते थे शिवजी की पूजा

झरनेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। इस मंदिर की स्थापना मराठा काल में की गई थी। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान भी यहां आकर भगवान शिव की पूजा करते थे। यहां हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

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