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उत्तर प्रदेश, राजस्थान में विद्यार्थियों से पढ़वाए जा रहे समाचार-पत्र, गुजरात में क्यों नहीं

Ahmedabad. डिजिटल दौर में जहां बच्चों की दुनिया मोबाइल और सोशल मीडिया तक सिमटती जा रही है, वहीं राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों में अखबार पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने को महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इन राज्यों में सरकारी और अनुदानित स्कूलों के छात्रों को दैनिक अखबार उपलब्ध कराए जा रहे […]

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एआइ की मदद से तैयार प्रतीकात्मक फोटो।

Ahmedabad. डिजिटल दौर में जहां बच्चों की दुनिया मोबाइल और सोशल मीडिया तक सिमटती जा रही है, वहीं राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों में अखबार पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने को महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इन राज्यों में सरकारी और अनुदानित स्कूलों के छात्रों को दैनिक अखबार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उनमें पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता और समसामयिक समझ विकसित हो सके।

अब यही मांग गुजरात में भी उठने लगी है कि जब ये दोनों राज्य बच्चों को अखबार से जोड़ रहे हैं, तो गुजरात में यह पहल क्यों नहीं?शिक्षाविदों का मानना है कि अखबार केवल खबर नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, भाषा, सामान्य ज्ञान और नागरिक चेतना का मजबूत माध्यम है। हिंदी व स्थानीय भाषा के अखबार बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।

उत्तरप्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर गुजरात के स्कूलों में भी विद्यार्थियों से समाचार पत्र पढ़वाने की मांग अभिभावकों की ओर से की जा रही है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि स्कूली बच्चे सिर्फ अपने विषय की ही किताबें पढ़ते हैं। यदि स्कूलों में प्रार्थना के समय विद्यार्थियों से समाचार पत्रों के प्रमुख समाचारों को पढ़वाया जाता है, तो इससे उनका सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और पढ़ने की आदत विकसित होगी। इतना ही नहीं, वे अपने शहर, राज्य व देश और दुनिया में होने वाली घटनाओं से परिचित हो सकेंगे।

राजस्थान में है यह व्यवस्था

दिसंबर 2025 में राजस्थान सरकार ने परिपत्र जारी किया है,जिसमें प्रार्थना के समय स्कूलों में 10 मिनट समाचार पत्र पढ़ने को कहा है। हर दिन एक शब्द का अर्थ भी समझाने को कहा है, ताकि बच्चों का शब्दकोश समृद्ध हो।

यूपी में भी यह व्यवस्था

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अखबार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसमें प्रति स्कूल न्यूनतम 1-2 अखबार अनिवार्य किए हैं। समाचार वाचन को बाल सभा या मॉर्निंग एक्टिविटी से जोड़ा है। शिक्षकों को सप्ताह में एक दिन समाचार चर्चा के लिए रखने का निर्देश दिया है।

समाचार पत्र पढ़ने से बढ़ेगा सामान्य ज्ञान

गुजरात के स्कूलों में भी छात्रों से समाचार पत्र पढ़वाने का आदेश जारी होना चाहिए। इससे उनका सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। इसका फायदा उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में भी होगा। आजकल के अधिकांश बच्चे समाचार पत्र पढ़ते ही नहीं हैं। कई युवाओं को तो यह भी मालूम नहीं होता है कि देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कौन है। ऐसे में इस प्रकार की पहल काफी फायदेमंद होगी। गुजरात सरकार को प्राथमिकता से इसे लागू करना चाहिए।

-जॉर्ज डायस, अध्यक्ष, विद्यार्थी-वाली अधिकार ग्रुप

देश-दुनिया की घटनाओं से रूबरू होंगे विद्यार्थी

जब उत्तरप्रदेश सरकार और राजस्थान सरकार स्कूलों में हर दिन प्रार्थना के बाद 10 मिनट समाचार पत्रों को पढ़ने का आदेश जारी कर सकते हैं, तो गुजरात सरकार को भी इसे लागू करना चाहिए। समाचार पत्र पढ़ने से विद्यार्थी देश-दुनिया में हर दिन होने वाली घटनाओं से परिचित हो सकेंगे। इससे उनकी पढ़ने की क्षमता बढ़ेगी और सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। वे उनके विषयी ज्ञान के अलावा देश, विदेश, खेलकूद, विज्ञान, कानून क्षेत्र की नई जानकारियों को प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि बच्चों को अच्छे समाचार ही चिन्हित कर पढ़ाए जाने चाहिए।

-पूजा प्रजापति, अध्यक्ष, पैरेन्ट्स एकता मंच

युवा पीढ़ी के लिए फायदेमंद होगी पहल

समाचार पत्र में देश-दुनिया के प्रमुख समाचार होते हैं, जिससे विद्यार्थियों से समाचार पढ़वाए जाने चाहिए। इससे वे देश-दुनिया की घटनाओं से जुड़ेगे। 10वीं-12वीं कक्षा तक अधिकांश बच्चे समाचार पत्र पढ़ते ही नहीं हैं। माता-पिता भी उन्हें यह समाचार पत्र नहीं पढ़ा पाते हैं। यदि स्कूलों में प्रार्थना के समय समाचार पत्र पढ़ाया जाता है, तो इससे बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। यह अच्छी पहल है। युवा पीढ़ी के लिए फायदेमंद होगी। गुजरात सरकार को भी स्कूलों में समाचार पत्र पढ़ाने का नियम लागू करना चाहिए। जल्द परिपत्र जारी कर, क्रियान्वयन कराना चाहिए।

-नरेश शाह, अध्यक्ष, ऑल गुजरात पैरेन्ट्स एसोसिएशन