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माइनस 25 डिग्री टेंपरेचर… बर्फीली हवाएं और उनके बीच 36 घंटे तक फंसे रहे 4 दोस्त

Tourists stranded in snow Ladakh : आगरा के 4 दोस्त लेह की भयंकर बर्फबारी में फंस गए। गूगल मैप की वजह से चारों दोस्त रास्ता भटक गए। चारों बमुश्किल सेना और पुलिस की मदद से घर वापस लौटे।

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लेह में फंसे आगरा के 4 दोस्त सकुशल घर पहुंचे, PC - X

आगरा : माइनस 25 डिग्री का तापमान…चारों ओर बर्फीली हवाएं और बर्फ-बर्फ ही। दूर-दूर तक सिर्फ बर्फ में लिपटी सफेद चादर। हम चिल्ला रहे थे। गाड़ी का हॉर्न बजा रहे थे…बर्तन पीट रहे थे, लेकिन हमको किसी ने नहीं सुना। ऊपर से एक हेलिकॉप्टर गुजरा, लाल कपड़ा लहराया, हाथ हिलाए, आवाज भी दी, फिर भी किसी की नजर नहीं पड़ी।

यह दर्दनाक कहानी है शिवम चौधरी, जयवीर, सुधांशु और यश मित्तल की। गूगल मैप के सहारे सफर कर रहे आगरा के चार दोस्त रास्ता भटक गए और बर्फबारी के बीच 36 घंटे तक जिंदगी के लिए संघर्ष करते रहे। इनमें आखिरी तीन घंटे सबसे ज्यादा खौफनाक थे।

शिवम बताते हैं, 'एक पल के लिए लगा अब नहीं बचेंगे। परिवार की याद आते ही आंखों से आंसू बहने लगे।' भारी जद्दोजहद के बाद चारों दोस्त जिंदा घर लौट सके। शिवम चौधरी और यश मित्तल ने 36 घंटे की पूरी दास्तां बताई।

बर्फ में फिसली कार, 20 फीट गहरी खाई में गिरे

शिवम के मुताबिक, उनके साथ मधुनगर निवासी यश मित्तल, जयवीर और सुधांशु फौजदार भी थे। चारों 9 जनवरी को कार से लेह के लिए रवाना हुए। 10 जनवरी को पंग में रुकना पड़ा। 11 जनवरी की रात मनाली के लिए निकले।

नाकीला के पास रात करीब ढाई बजे भारी बर्फबारी के कारण कार फिसल गई और करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के बाद उन्हें समझ आ गया कि वहां मदद मिलना बेहद मुश्किल है।

ठंड में कार का हीटर बना सहारा

भयानक ठंड के बीच चारों दोस्तों ने गाड़ी में हीटर चलाकर रात गुजारी। दिन निकलने पर आसपास देखा, लेकिन दूर-दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आया। थोड़ी दूर पैदल जाने की कोशिश की, मगर सर्दी इतनी ज्यादा थी कि ज्यादा देर बाहर रहना मुमकिन नहीं था। मजबूरन फिर कार के पास लौट आए। वह पूरा दिन भी हीटर के सहारे ही बीता। तापमान लगातार गिरता जा रहा था और शरीर सुन्न पड़ने लगा था।

कार का खत्म हो गया डीजल

शिवम बताते हैं, 'हम 36 घंटे से ज्यादा वक्त बर्फ के बीच फंसे रहे। कार छोड़ने से करीब तीन घंटे पहले लगा कि अब बचना मुश्किल है।' लगातार कार स्टार्ट रहने से डीजल खत्म हो गया और जिस हीटर के सहारे जान टिकी थी, वह भी बंद हो गया।

खाने के लिए कुछ नहीं बचा था। ठंड की वजह से शरीर अकड़ने लगा। शिवम और सुधांशु की हालत सबसे ज्यादा बिगड़ गई थी, जबकि जयवीर और यश भी बेहद कमजोर हो चुके थे। ठंड के कारण मोबाइल फोन भी बंद हो गए थे, जिससे किसी से संपर्क संभव नहीं था।

हेलिकॉप्टर देख लहराया लाल कपड़ा

12 जनवरी को दिन के वक्त ऊपर से एक हेलिकॉप्टर गुजरा। चारों दोस्तों ने लाल कपड़ा दिखाया, हाथ हिलाए और आवाज लगाई, लेकिन हेलिकॉप्टर में सवार लोगों ने उन्हें नहीं देखा। उस पल उम्मीद की आखिरी किरण भी टूटती नजर आई।

चारों दोस्तों ने डिसाइड किया कि ऐसे जिंदगी की जंग हारने से अच्छा है कि कुछ करके देखें… चारों दोस्त मदद के लिए निकल पड़े। 13 जनवरी की दोपहर करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर चारों दोस्त व्हिस्की नाला के पास बंद फैक्ट्री के पास पहुंचे चारों ने वहीं पर रात गुजारी। फैक्ट्री के अंदर पहुंचने से पहले उसके गेट पर लिख दिया 'हेल्प अस', जिससे अगर वहां से कोई निकले तो वह उनकी मदद कर सके। जैसे ही बाहर आहट हुई तो लगा कि ये तो पुलिस वाले हैं। पुलिसवालों को देखकर चारों के आंसू निकल आए। चारों दोस्त उनसे लिपटकर रोने लगे।

शिवम चौधरी के पिता ने बताया कि जब बच्चों की दो दिन तक कोई खबर नहीं मिली तो हमने स्थानीय सांसद की मदद से सेना और पुलिस से संपर्क साधा। सेना और वहां की लोकल पुलिस ने काफी सहयोग किया।