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भारत, Jun 05, 2026

7 साल बाद होगा कुछ बड़ा! पहले ट्रंप फिर पुतिन पहुंचे चीन अब जिनपिंग जा रहे नार्थ कोरिया

China North Korea Relation: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते सात साल बाद उत्तर कोरिया का दौरा करेंगे, जो 2026 की उनकी पहली विदेश यात्रा होगी।

Xi Jinping North Korea Visit

7 साल बाद जिनपिंग जा रहे नार्थ कोरिया (X)

Xi Jinping North Korea Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया के दौरे पर जाने वाले हैं। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, शी जिनपिंग 8 जून से 9 जून तक उत्तर कोरिया की यात्रा करेंगे। यह दौरा उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के निमंत्रण पर हो रहा है।

क्यों जरुरी है दौरा?

यह दौरा कई कारणों से बेहद जरुरी माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि शी जिनपिंग पिछले सात सालों में पहली बार उत्तर कोरिया का दौरा करेंगे। ऐसे समय में जब चीन वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक ताकत को मजबूत करने में जुटा है, यह दौरा उसकी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

2026 की पहली विदेश यात्रा होगी

उत्तर कोरिया की यह यात्रा 2026 में शी जिनपिंग की पहली विदेश यात्रा होगी। इससे पहले उन्होंने पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को चीन आमंत्रित किया था, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुनकर शी जिनपिंग दुनिया को एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं।

चीन और उत्तर कोरिया के रिश्ते कितने मजबूत हैं?

शी जिनपिंग और किम जोंग उन के बीच आखिरी मुलाकात सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई थी। उस दौरान चीन में आयोजित एक सैन्य परेड में किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।

2019 में पत्नी के साथ नार्थ कोरिया गए थे शी जिनपिंग

इससे पहले 2019 में जब शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन उत्तर कोरिया पहुंचे थे, तब उनका भव्य स्वागत किया गया था। दोनों देशों ने उस दौरान अपनी अटूट दोस्ती और मजबूत साझेदारी का प्रदर्शन किया था। गौरतलब है कि 2005 में पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ की यात्रा के बाद लंबे समय तक कोई चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया नहीं गया था।

नार्थ कोरिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चीन?

नार्थ कोरिया दुनिया के सबसे अधिक कूटनीतिक रूप से अलग-थलग देशों में गिना जाता है। उस पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं, जिसके कारण उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक चीन पर निर्भर है। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, नार्थ कोरिया के कुल विदेशी व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा चीन के साथ होता है। वहीं, उत्तर कोरिया अपने कुल निर्यात का करीब 85 प्रतिशत चीन को भेजता है। यही वजह है कि चीन को उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी माना जाता है।

क्या है शी जिनपिंग के दौरे का बड़ा संदेश?

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश फाउंडेशन के विशेषज्ञ सेओंग-ह्योन ली का मानना है कि नार्थ कोरिया को अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए चुनना शी जिनपिंग का एक सोचा-समझा कदम है। उनके अनुसार, चीन इस दौरे के जरिए पश्चिमी देशों की उस धारणा को चुनौती देना चाहता है जिसमें कहा जाता है कि उत्तर कोरिया अब धीरे-धीरे रूस के प्रभाव क्षेत्र में जाता दिख रहा है। यह यात्रा दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश है कि बीजिंग और प्योंगयांग के रिश्ते अब भी मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग कायम है।

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