25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

US-Iran Tension: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट, क्या ट्रंप का ‘शांति’ वाला दावा दुनिया को जंग से बचा पाएगा ?

Middle East Crisis: ईरान में भड़के आंतरिक विद्रोह और अमेरिका की भारी सैन्य तैनाती ने जंग के हालात पैदा कर दिए हैं। जानें क्या राष्ट्रपति ट्रंप का दावा मिडिल ईस्ट में शांति लाएगा या यह किसी बड़े तूफान की दस्तक है।

3 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Jan 16, 2026

Donald Trump and Khamenei0

डोनाल्ड ट्रंप और खामेनेई

Military Escalation: दुनिया साल 2026 की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर भीषण युद्ध के कगार पर खड़ी हुई नजर आ रही है। ईरान में भड़के आंतरिक विद्रोह (US Iran War news) और अमेरिका की आक्रामक सैन्य घेराबंदी ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान की ओर से अपनी हवाई सीमा (Airspace) बंद करना और अमेरिका द्वारा भारी युद्धपोतों की तैनाती करना इस बात का संकेत है कि स्थिति कभी भी नियंत्रण (US Iran War news) से बाहर हो सकती है। ईरान इस समय दोहरे मोर्चे पर संघर्ष कर रहा है। देश के अंदर महंगाई और सरकार की सख्त नीतियों के खिलाफ जनता सड़कों पर है। इस विद्रोह को दबाने के लिए की गई कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान अलग-थलग पड़ गया है। सैन्य हस्तक्षेप के खतरे के कारण ईरान ने अपनी हवाई सीमा पूरी तरह से बंद कर दी है। यह कदम न केवल रक्षात्मक है, ,बल्कि यह बाहरी हस्तक्षेप रोकने की एक बड़ी कोशिश भी है।

डोनाल्ड ट्रंप का विरोधाभासी बयान: कूटनीति या भ्रम ? (Donald Trump Iran statement)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में "हत्याएं रुक गई हैं" और वहां शांति बहाल हो रही है। जहां एक ओर इसे तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखाजा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। ट्रंप के इस दावे के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

समुद्र में बढ़ती हलचल: अमेरिकी नौसेना की तैनाती (USS Abraham Lincoln deployment)

ट्रंप के 'शांति' वाले बयान के ठीक विपरीत, पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपने सबसे शक्तिशाली नौसैनिक बेड़े, USS अब्राहम लिंकन को तैनात कर दिया है। इस बेड़े के साथ परमाणु पनडुब्बियां और मिसाइल विध्वंसक जहाज भी शामिल हैं। यह तैनाती स्पष्ट करती है कि अमेरिका किसी भी आकस्मिक या आपात स्थिति के लिए तैयार है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह 'शक्ति प्रदर्शन' (Show of Strength) नीति ईरान को किसी भी बड़े कदम से रोकने के लिए पर्याप्त है।

अब दुनिया क्या कह रही है ?

संयुक्त राष्ट्र (UN): महासचिव ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि एक और युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा।

चीन और रूस: इन दोनों देशों ने अमेरिका की सैन्य तैनाती को "उकसावे वाली कार्रवाई" बताया है और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है।

इजराइल: इजराइल ने अमेरिकी कदम का स्वागत किया है और इसे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।

अब आगे क्या होगा ?

आने वाले 48 घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं। यदि ईरान अपनी हवाई सीमा दुबारा नहीं खोलता और अमेरिकी युद्धपोत ईरानी जलसीमा के करीब पहुंचते हैं, तो सीधे तौर पर टकराव संभव है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नजरें राष्ट्रपति ट्रंप के अगले ट्वीट या आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं, जो यह साफ करेगा कि अमेरिका वास्तव में वार्ता चाहता है या युद्ध।

तेल की कीमतों का भारत पर असर (Global oil crisis 2026)

इस तनाव का सबसे गहरा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ेगा। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो सकती है।

भारत के लिए चुनौती

बहरहाल,भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। साथ ही, तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ा सकती हैं। भारत सरकार पहले ही 'इवैक्युएशन प्लान' पर चर्चा शुरू कर चुकी है।