
डोनाल्ड ट्रंप की H-1B वीज़ा सख्ती। (फोटो:वॉशिंगटन पोस्ट,डिजाइन:पत्रिका)
Visa Restrictions: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति आक्रामक रूप से लागू करना शुरू कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए दुनिया के 75 देशों के नागरिकों के लिए नए वीज़ा जारी करने पर अनिश्चितकाल के लिए रोक (Donald Trump Visa Ban List) लगा दी है। इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें कई विकासशील और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध आव्रजन (Illegal Immigration) रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिन देशों की सरकारें (US Immigration Policy 2026)अपने उन नागरिकों को वापस लेने में सहयोग नहीं कर रही हैं, जिन्हें अमेरिका से निर्वासित (Deport) किया गया है, उन्हें अब वीज़ा प्रतिबंधों (Visa Restrictions) का सामना करना होगा। ट्रंप ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वे अमेरिकी सीमाओं की सुरक्षा करेंगे और यह फैसला उसी दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि प्रतिबंधित देशों की आधिकारिक सूची में बदलाव होते रहते हैं, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक इसमें अफ्रीकी, एशियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों की बड़ी संख्या शामिल है। इन देशों के नागरिकों के लिए अब बिजनेस (B1) और टूरिस्ट (B2) वीज़ा प्राप्त करना लगभग नामुमकिन हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ये देश अमेरिकी शर्तों को नहीं मानते, तब तक उनके नागरिकों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद रहेंगे।
इस पाबंदी का असर न केवल पर्यटकों पर, बल्कि उन छात्रों और पेशेवरों पर भी पड़ सकता है, जो नए शैक्षणिक सत्र या रोजगार के लिए अमेरिका जाने की योजना बना रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से अमेरिका के शिक्षा उद्योग और तकनीकी क्षेत्र में मैनपावर की कमी हो सकती है। हालांकि, मौजूदा वीज़ा धारकों के लिए अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे लाखों प्रवासियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।
वैश्विक प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को 'भेदभावपूर्ण' बताया है। प्रभावित देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के खिलाफ बताया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी जनता: ट्रंप समर्थकों ने इसे 'ऐतिहासिक और साहसी' कदम बताया है, जबकि विपक्षी डेमोक्रेट्स इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और छवि के लिए घातक मान रहे हैं।
अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रभावित देश अमेरिका के साथ 'डिपोर्टेशन' समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं। विदेश विभाग (State Department) जल्द ही एक विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकता है, जिसमें स्पष्ट होगा कि क्या इन 75 देशों के लिए मानवीय आधार पर कोई छूट दी जाएगी या नहीं।
बहरहाल, इस फैसले का एक बड़ा आर्थिक पक्ष 'ट्रैवल इंडस्ट्री' से जुड़ा हुआ है। अमेरिका दुनिया के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक है। अब 75 देशों पर पाबंदी का मतलब है कि अमेरिकी होटलों, एयरलाइंस और पर्यटन स्थलों को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, भारत जैसे देशों के लिए यह खबर सतर्क करने वाली है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन एच-1बी (H-1B) वीज़ा नियमों को भी और सख्त करने की तैयारी में है।
Updated on:
14 Jan 2026 09:14 pm
Published on:
14 Jan 2026 09:13 pm
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