
ईरान प्रदर्शन
ईरान में पिछले कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। इनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, अमेरिका ने ईरान के खामेनेई शासन को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती नहीं रोकी गई तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी पीछे नहीं हटेगा। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के मामले में कार्रवाई की थी, जिससे अमेरिका की धमकियों को ईरान के लिए गंभीर रूप से लिया जा रहा है।
साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने ईरान से मांग की है कि वह राजनीतिक कैदियों को जल्द से जल्द रिहा करे। फारसी भाषा के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए ट्वीट में अमेरिका ने कहा "हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम उन राजनीतिक कैदियों को भूल गए हैं जिन्हें विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था।"
ट्वीट में ईरान की जेल में बंद आठ प्रमुख राजनीतिक कैदियों के नाम भी दिए गए हैं जिनमे नरगिस मोहम्मदी, सपीदेह गोलियान, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नाजेमी, रजा खंदान, मजीद तवक्कोली, शरीफेह मोहम्मदी और हुसैन रोनागी।
नरगिस मोहम्मदी
नरगिस मोहम्मदी, 53 वर्ष, ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (DHRC) की उप-निदेशक हैं। महिलाओं के अधिकारों के अलावा, वे मृत्युदंड और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी अभियान चलाती रही हैं। 2023 में उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। वर्तमान में उन्हें तेहरान की एविन जेल में बंद किया गया है।
सपीदेह गोलियान
महिला अधिकार कार्यकर्ता और फ्रीलांस जर्नलिस्ट गोलियान को हड़ताल कर रहे श्रमिकों के समर्थन में उनके प्रदर्शन के कारण 2018 में पहली बार गिरफ्तार किया गया था। 2025 में स्मृति सभा में शामिल होने के बाद उन्हें पुनः हिरासत में लिया गया।
जवाद अली-कोर्दी
मानवाधिकार वकील और यूनिवर्सिटी लेक्चरर जवाद को 12 दिसंबर 2025 को उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया गया। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश और राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप है।
पूरान नाजेमी
करमान प्रांत की महिला और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता। नरगिस मोहम्मदी के साथ गिरफ्तार हुईं।
रजा खंदान
मानवाधिकार कार्यकर्ता और ग्राफिक डिजाइनर, हिजाब आंदोलन और मौत की सजा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कई बार जेल जा चुके हैं।
मजीद तवक्कोली
स्टूडेंट नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता। छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना के कारण 2009 से जेल में हैं।
शरीफेह मोहम्मदी
सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्हें महसा अमीनी की मौत के बाद हिजाब विरोधी आंदोलनों में भाग लेने के लिए दिसंबर 2023 में गिरफ्तार किया गया। 2024 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
हुसैन रोनागी
ब्लॉगर और इंटरनेट की आजादी के हिमायती। कई बार जेल में रहे, वर्तमान में स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद हिरासत में हैं।
Published on:
14 Jan 2026 03:18 pm
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