
ईरान में विरोध प्रदर्शन करते प्रदर्शनकारी। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Trump Threats: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन (Iran Protests)अब पूरे देश में फैल चुके हैं। ये विरोध मुख्य रूप से आर्थिक संकट के कारण भड़के हैं, लेकिन अब ये सरकार के खिलाफ बड़े बदलाव की मांग में बदल गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की स्थिति पहले के प्रदर्शनों से बहुत अलग और गंभीर है। आलम यह है कि ईरान की मुद्रा रियाल का मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर गिर गया है, जिससे महंगाई आसमान छू रही है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें 70% तक बढ़ गई हैं। पानी की कमी, बिजली कटौती और बेरोजगारी ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। अमेरिका के सख्त प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था और कमजोर हो गई है। उधर ट्रंप प्रदर्शनकारियों (Trump Threats) की पीठ थपथपा रहे हैं।लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ चुका है कि वो इन समस्याओं का समाधान कर सके।
ध्यान रहे कि तेहरान के ग्रैंड बाजार में 28 दिसंबर 2025 को दुकानदारों ने रियाल की गिरावट के विरोध में दुकानें बंद कर दी थीं। जल्द ही ये विरोध पूरे देश में फैल गया। छात्र, ट्रक ड्राइवर, व्यापारी और आम नागरिक सभी शामिल हो गए। ये व्यापक सामाजिक एकजुटता दिखाता है।
ईरान में 2009, 2019 और 2022 में भी बड़े विरोध हुए थे। उनमें सरकार ने दमन किया और कुछ रियायतें देकर स्थिति संभाली, लेकिन इस बार आंतरिक और बाहरी दबाव एक साथ हैं। 2025 में इजराइल के साथ 12 दिनों का युद्ध हुआ, जिसमें ईरान की रक्षा क्षमता कमजोर हुई। क्षेत्रीय सहयोगी जैसे सीरिया में असद सरकार गिर गई। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करने की धमकी दे रहे हैं और प्रदर्शनकारियों की "मदद" करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की भी बात की है।
ईरानी सरकार फंसी हुई है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने खुद माना कि आर्थिक समस्याओं का हल निकालना मुश्किल है। सुरक्षा बल हिंसक हो गए हैं, इंटरनेट बंद कर दिया गया और हजारों गिरफ्तारियां हुईं। मौतों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। लेकिन दमन के बावजूद कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा।
ईरान के अधिकारी मानते हैं कि ये विरोध सिर्फ आंतरिक नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल समर्थित हैं। सेना ने बयान जारी कर सरकार का समर्थन किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये विरोध प्रदर्शन ईरान को अभूतपूर्व संकट में डाल रहा है। सरकार के पास सुधार या रियायत देने के विकल्प कम हैं।
बहरहाल,इस बार विरोध पहले से ज्यादा खतरनाक हैं क्योंकि आर्थिक तबाही के साथ विदेशी सैन्य धमकी जुड़ी है। सरकार दबाव में है और लोग अब सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि बड़े बदलाव चाहते हैं। क्या ये प्रदर्शन शासन को हिला देंगे, ये आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
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Updated on:
14 Jan 2026 01:01 pm
Published on:
14 Jan 2026 12:57 pm
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