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इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए क्यों चुना शनिवार का ही दिन, जानें चौंकाने वाली वजह

अमेरिका और इजरायल ने शनिवार सुबह तेहरान में Iran–Israel war: संयुक्त हमला कर आयतुल्लाह अली खामेनेई को निशाना बनाया। हमले के बाद ईरान ने कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन दागे, जिससे मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हो गया

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भारत

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Himadri Joshi

Mar 01, 2026

Iran–Israel war

इजरायल ने किया ईरान पर हमला (फोटो- एएनआई)

Iran–Israel war: Iran–Israel war: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव शनिवार को चरम पर पहुंच गया, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान में बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। यह हमला ऐसे समय हुआ जब क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास जारी थे और ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में बातचीत बेनतीजा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह हुई गुप्त बैठक की जानकारी मिलते ही अमेरिका इजरायल ने खामेनेई के ठिकाने पर अचानक स्ट्राइक कर दी, जिसमें उनकी मौत की पुष्टि हुई है।

देरी होती तो सुरक्षित स्थान पर चले जाते खामेनेई

सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई शनिवार शाम अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ बैठक करने वाले थे। लेकिन इजरायली इंटेलिजेंस को शनिवार सुबह ही बैठक की सूचना मिल गई। इसके बाद हमले का समय बदलकर तुरंत कार्रवाई की गई। अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि अगर देरी होती तो खामेनेई सुरक्षित ठिकाने पर चले जाते और सरप्राइज का तत्व खत्म हो जाता। जैसे ही ऑपरेशन शुरू हुआ, तेहरान स्थित उनका हाई सिक्योरिटी कंपाउंड निशाने पर लिया गया और अटैक किया गया। सैटेलाइट इमेजरी में उसके नष्ट होने की पुष्टि हुई है।

खामेनेई के परिवार के सदस्य भी हमले में मारे गए

इजरायल ने दावा किया कि खामेनेई के साथ अली शामखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पकपौर भी मारे गए। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी हमले में बच गए और उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी। सरकारी टेलीविजन ने रविवार तड़के खामेनेई की मौत की पुष्टि की और काले बैनर के साथ प्रसारण किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके परिवार के कुछ सदस्य भी हमले में मारे गए। इस घटनाक्रम को ईरानी मीडिया ने शहादत के रूप में पेश किया है।

ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय संकट

हमले के तुरंत बाद ईरान ने इजरायल, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और कुवैत पर ड्रोन और मिसाइलों की बौछार की। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि यह इतिहास का सबसे भीषण ऑपरेशन होगा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर खामेनेई की मौत पर टिप्पणी की। विश्लेषकों का मानना है कि यह 46 साल पुराने शिया शासन के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है और पूरे मिडिल ईस्ट में व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।