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भारत, May 30, 2026

दुश्मन ने ईरान पर दागा ड्रोन, सेना ने हवा में ही मार गिराया

Iran-US Conflict: ईरानी मीडिया के अनुसार उनकी सेना ने एक दुश्मन ड्रोन को केशम आइलैंड के पास इंटरसेप्ट किया। इसके बाद सेना के एयरडिफेंस सिस्टम ने उसे हवा में ही मार गिराया।

Iran destroys drone

ईरान ने मार गिराया दुश्मन का ड्रोन (Representational Photo)

अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच जल्द ही डील हो सकती है। डील की शर्तों पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और अब सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ग्रीन सिग्नल मिलना बाकी है। इसी बीच ईरान में एक बार फिर दुश्मन की एक्टिविटी देखी गई। ईरानी मीडिया के अनुसार केशम आइलैंड के पास उनकी सेना ने एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। इसके बाद सेना के एयरडिफेंस सिस्टम ने मिसाइल दागते हुए उस ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।

किसने दागा ड्रोन?

ईरान पर यह ड्रोन किसने दागा, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है और न ही मिडिल ईस्ट में किसी देश ने इस बारे में कोई दावा किया है। हालांकि ड्रोन किसने दागा, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

ट्रंप ने रखी शर्तें

इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के सामने शर्तें रख दी हैं। सिचुएशन रूम में मीटिंग से पहले ट्रंप ने लिखा, "ईरान को इस बात पर सहमत होना होगा कि वो कभी भी कोई परमाणु हथियार या बम नहीं रखेंगे। होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत खोला जाना चाहिए और वो भी बिना किसी टोल के जिससे दोनों दिशाओं में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के हो सके। पानी में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगें अगर कोई बची हों, तो उन्हें हटा दिया जाएगा। हमने अपने बेहतरीन अंडरवॉटर माइन स्वीपर्स की मदद से विस्फोट करके ऐसी कई सुरंगों को पहले ही हटा दिया है। ईरान उन सभी माइन को तुरंत हटाने या विस्फोट करके नष्ट करने का काम पूरा करेगा जो अभी भी बची हुई हैं और जिनकी संख्या अब ज़्यादा नहीं होगी। हमारे ज़बरदस्त और कमाल की नाकेबंदी के कारण जो जहाज इस जलमार्ग में फंस गए थे और जिसे अब हटा लिया जाएगा वो अब अपने घर की ओर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। ईरान का संवर्धित यूरेनियम, जिसे कभी-कभी 'परमाणु धूल' भी कहा जाता है, जो ज़मीन के बहुत नीचे दबी हुई, उसे अमेरिका द्वारा बाहर निकाला जाएगा और इस बात पर सहमति बनी है कि चीन के साथ-साथ, केवल अमेरिका ही एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास ऐसा करने की तकनीकी क्षमता मौजूद है। ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ घनिष्ठ समन्वय और सहयोग से किया जाएगा और उस सामग्री को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। अगली सूचना मिलने तक किसी भी प्रकार के धन का कोई लेन-देन नहीं किया जाएगा। अन्य कुछ ऐसे मुद्दों पर भी सहमति बन गई है, जिनका महत्व इन मुद्दों की तुलना में काफी कम है।"

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