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भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं? ट्रंप के दावे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिया जवाब

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर साफ कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्ध है। रूस से तेल खरीद पर फैसला भारतीय कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिम के आधार पर करती हैं।

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External Affairs Minister S. Jaishankar (Photo - IANS)

S Jaishankar on Russia oil: म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर जर्मनी में है। यहां एक चर्चा के दौरान उनसे अमेरिका से ट्रेड डील के बाद रूसी तेल खरीद और इससे रणनीतिक स्वायत्ता पर पड़ने वाले असर से जुड़े कड़े सवाल पूछे गए। इस पर उन्होंने बड़ी ही बेबाकी से विचार रखे और कहा, मुझे लगता है कि अपनी रणनीतिक स्वायत्ता के प्रति हम पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह हमारे विकास और हमारे इतिहास की प्रक्रिया का अहम हिस्सा रही है।

रूसी तेल खरीद पर उन्होंने कहा, जहां तक ऊर्जा यानी तेल से जुड़े मुद्दों की बात है। आज के दौर में बाजार काफी जटिल है, जैसा कि यूरोप और शायद दुनिया के अन्य हिस्सों में है। भारतीय तेल कंपनियां उपलब्धता, लागत देखती है और जोखिम को परखती हैं। फिर वही फैसले लेती हैं, जिन्हें वे सबसे ज्यादा अपने हित में मानती हैं।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने का ऑफर भी दिया गया है। अमेरिका के तमाम दावों के बावजूद भारत की तरफ से अब तक किसी तरह का स्पष्ट बयान नहीं आया है।

क्या कहना है रूस?

रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव पर हाल ही में क्रेमलिन की तरफ से बयान आ चुका है। इस बयान में कहा गया है कि किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए भारत स्वतंत्र है। कच्चे तेल की आपूर्तिकर्ता में विविधता लाने में उसके निर्णय में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस भारत को पेट्रोलियम बेचने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत अपनी जरूरतों के मुताबिक इस पर फैसला लेता आया है। यदि वह किसी नए देश से तेल खरीदता है तो इसमें कुछ नया नहीं है।

गौरतलब है कि कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेल डील पर सहमति बनी है। दोनों देशों की तरफ से एक फ्रेमवर्क पर सहमति जताई गई है।