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‘हमारे नाम पर पड़ोसी देशों पर हमले मत करो!’, हमास ने ईरान को दी खुल्लमखुल्ला चेतावनी

Diplomacy : मध्य पूर्व में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। हमास ने अपने सबसे बड़े समर्थक ईरान से अपील की है कि वह खाड़ी देशों पर हमले रोके और अपने आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 14, 2026

Iran Attack on Dubai

ईरान ने हाल ही में दुबई पर हमला किया। फाइल (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Gulf States: ईरान की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कूटनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। अब तक जिस ईरान को हमास का सबसे बड़ा मददगार और ढाल माना जाता था, उसी ईरान को हमास ने एक सार्वजनिक और कड़ी नसीहत (Hamas warns Iran )दे डाली है। हमास ने आधिकारिक तौर पर ईरान से अपील की है कि वह पड़ोसी खाड़ी देशों (Gulf States) पर किसी भी तरह के हमले तुरंत बंद करे। मीडिया रिपोर्ट्स से यह साफ हो गया है कि हमास अब पूरे अरब क्षेत्र को एक बड़े युद्ध (Iran proxy war) में झोंकने के पक्ष में नहीं है।

हमारा संघर्ष केवल इजराइल के खिलाफ है: हमास (Israel Hamas updates)

हमास के नेतृत्व ने अपने हालिया बयान में यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि उनका वर्तमान संघर्ष केवल इजराइल के खिलाफ है और यह उनके आत्मरक्षा (Self-defence) के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। हमास ने साफ किया कि वे नहीं चाहते कि उनके समर्थन की आड़ में ईरान पूरे क्षेत्र का माहौल बिगाड़े या पड़ोसी देशों की संप्रभुता को खतरे में डाले। यह बयान इस मायने में बेहद अहम है क्योंकि ईरान लगातार अपने क्षेत्रीय दबदबे को बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीतियां अपना रहा है, जिससे सऊदी अरब और यूएई जैसे पड़ोसी देश सीधे तौर पर असहज हो रहे थे।

हमास ने खुद को अलग दिखाने की सफल कोशिश की

कूटनीतिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हमास किसी भी कीमत पर अरब देशों की सहानुभूति और कूटनीतिक समर्थन नहीं खोना चाहता। अगर ईरान लगातार खाड़ी देशों पर दबाव बनाएगा या छद्म युद्ध (Proxy War) के जरिए उन्हें निशाना बनाएगा, तो सुन्नी बहुल अरब मुल्क पूरी तरह से हमास से किनारा कर सकते हैं। अपनी राजनीतिक और कूटनीतिक जमीन बचाने के लिए ही हमास ने यह मास्टरस्ट्रोक चला है। इस कदम के जरिए हमास ने तेहरान की विस्तारवादी नीतियों से खुद को रणनीतिक रूप से अलग दिखाने की सफल कोशिश की है।

अरब जगत ने राहत की सांस ली (Gulf States security)

हमास के इस ताजा रुख पर अरब जगत ने राहत की सांस ली है। खाड़ी देशों के राजनयिकों का मानना है कि हमास का यह बयान तनाव कम करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है। वहीं, इजरायली रक्षा विशेषज्ञों ने इसे ईरान और हमास के बीच पैदा हुई अंदरूनी दरार के तौर पर देखना शुरू कर दिया है, हालांकि कुछ इसे महज़ एक अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा भी मान रहे हैं।

ईरान के अगले कदम से मिडिल ईस्ट के भविष्य की दिशा तय होगी(Middle East conflict)

अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान का नेतृत्व हमास की इस दो टूक नसीहत पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या ईरान हमास की इस अपील को मानकर अपने कदम पीछे खींचेगा या फिर अपनी आक्रामक नीतियों पर कायम रहेगा? ईरान के विदेश मंत्रालय के अगले कदम से ही मिडिल ईस्ट के भविष्य की दिशा तय होगी।




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