भारत, Jun 01, 2026

गाजा में युद्ध का असर 4 से 6 साल के बच्चों पर असर सबसे अधिक है। (File Photo - IANS)
Gaza War: गाजा में युद्ध भले ही थम गया, लेकिन युद्ध के निशां पीढिय़ों तक पीछा नहीं छोड़ने वाले। युद्ध का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय संस्था डॉक्टर विदाउट बॉर्डर (एमएसएफ) के अनुसार गाजा में 10 लाख से ज्यादा बच्चों पर युद्ध का ऐसा आघात हुआ कि उन्होंने बोलना ही छोड़ दिया। एमएसएफ से जुड़ीं बाल मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लिट्ज ब्रुबाक के अनुसार, गाजा में ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो पूरी तरह खामोश हो चुके हैं। इनमें 4 से 6 साल के बच्चे ज्यादा हैं, क्योंकि वे हमलों के वक्त तेजी से भाग नहीं पाते। अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और पोषण की कमी के कारण उनके शारीरिक घाव तो देरी से भर रहे हैं, लेकिन उनके मन पर लगे 'अदृश्य घाव' जिंदगी भर के लिए रह सकते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब कोई बच्चा लंबे समय तक अत्यधिक तनाव और डर के साए में जीता है, तो उसका नर्वस सिस्टम जवाब दे देता है। अत्यधिक डर के कारण बच्चों के दिमाग का अमिगडाला बड़ा हो जाता है जो तीव्र भावनाओं को संभालता है, जबकि सोचने-समझने और सामाजिक व्यवहार को नियंत्रित करने वाला हिस्सा कमजोर पड़ जाता है। इसके कारण बच्चों का मानसिक विकास पूरी तरह रुक जाता है।
गाजा में 5 साल के एडम की कहानी दिल दहला देने वाली है। युद्ध से पहले वह खुशमिजाज और चहकता रहता था, लेकिन बमबारी के बाद उसे अपने परिवार के साथ टेंट में रहना पड़ा। एक दिन हमले में उसका परिवार गंभीर घायल हो गया। उसने अपनी आंखों के सामने पिता को मरते देखा। कुछ दिन बाद मां भी चल बसी। इस हादसे के बाद एडम ने पूरी तरह बोलना बंद कर दिया। उसने बोलना बंद कर दिया और खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया।
गाजा जैसे संघर्ष क्षेत्रों में विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे बच्चों के लिए दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। सुरक्षित माहौल, नियमित काउंसलिंग, खेल-आधारित थेरेपी और परिवारिक पुनर्वास से धीरे-धीरे बच्चों को सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब ट्रॉमा-केयर प्रोग्राम बढ़ाने पर जोर दे रही हैं ताकि यह पीढ़ी स्थायी मानसिक क्षति से बच सके।
Published on: 01 Jun 2026 05:12 am

कोई कमेंट नहीं है।
पहले कमेंट करने वाले बनें।