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बांग्लादेश में बड़ा फैसला! 2024 के आंदोलन पर कार्रवाई के दोषी पूर्व पुलिस प्रमुख को मौत की सजा

जुलाई से अगस्त 2024 के बीच प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए हसीना सरकार द्वारा चलाए गए अभियान में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।

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भारत

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Ashib Khan

Jan 26, 2026

Bangladesh Election

बांग्लादेश चुनाव से पहले इस्लामिक कंजर्वेटिव पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भारत समेत पड़ोसी देशों को लेकर अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाया है। (File Photo)

बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को शेख हसीना के शासनकाल के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में ढाका के फरार पूर्व पुलिस प्रमुख हबीबुर रहमान और उनके दो वरिष्ठ सहयोगियों को फांसी की सजा सुनाई। तीनों को अदालत ने अनुपस्थिति में दोषी ठहराया है और फिलहाल उनके ठिकाने अज्ञात हैं।

6 प्रदर्शनकारियों को मारी थी गोली

बता दें कि मामला 5 अगस्त 2024 को ढाका में हुए उस हिंसक घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें छह प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसी दिन भारी जनविरोध के बीच शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गई थीं और प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर धावा बोल दिया था।

चुनाव से पहले आया फैसला

यह फैसला 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले आया है। यह चुनाव 17 करोड़ आबादी वाले इस दक्षिण एशियाई देश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद पहला चुनाव होगा। इसी मामले में पांच अन्य पूर्व पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग अवधि की जेल की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि जुलाई से अगस्त 2024 के बीच प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए हसीना सरकार द्वारा चलाए गए अभियान में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।

कोर्ट ने क्या कहा?

फैसला सुनाते हुए जस्टिस गोलाम मोर्तुजा मोजुमदार ने कहा, “पुलिस बलों ने घातक हथियारों से गोलियां चलाईं, जिससे छह लोगों की मौत हुई।”

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि तत्कालीन ढाका पुलिस प्रमुख हबीबुर रहमान ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पुलिस इकाइयों को घातक बल प्रयोग करने के आदेश संदेशों के जरिए भेजे थे।

मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि अदालत ने तीनों दोषियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध साबित माना है। हालांकि उन्होंने जेल की सजा पाए पांच अन्य दोषियों के लिए और कड़ी सजा की मांग की।

शेख हसीना को भी सुनाई थी फांसी की सजा

इससे पहले नवंबर में इसी अदालत ने शेख हसीना को भी मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अनुपस्थिति में फांसी की सजा सुनाई थी। हसीना ने मुकदमे में शामिल होने से इनकार किया है और सभी आरोपों को खारिज किया है। उसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी अनुपस्थिति में मौत की सजा दी गई थी।