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भूखे खेत, सूखे अरमान : 550 करोड़ की जावर उद्वहन सिंचाई योजना में भ्रष्टाचार

जावर-सिहाड़ा सिंचाई योजना में भ्रष्टाचार, किसानों ने सरकार से न्याय की मांग

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खंडवा

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Manish Arora

Jan 17, 2026

जावर-सिहाड़ा क्षेत्र के किसानों ने जावर-सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ आवाज़ उठाई है। चंदन सिंह राजपूत, ब्रजेश सिंह पवार के नेतृत्व में शुक्रवार को किसानों ने रैली निकालकर जावर थाने में ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल और लोकायुक्त के नाम सौंपे ज्ञाप में किसानों ने भ्रष्टाचार की जांच कर एफआइआर करने की मांग की है।

जावर सिंचाई योजना में भ्रष्टाचार को लेकर किसानों ने भकराड़ा से होते हुए खेड़ी, पिपलिया फूल, ढोरानी, खुटफल, बमनगांव सहित आस पास के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ज्ञापन दिया। किसानों ने बताया कि वर्ष 2017 में सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का टेंडर जीवीपीआर कंपनी को दिया गया था, जिसकी लागत 550 करोड़ थी और कार्य अवधि 2021 से 2024 तक निर्धारित थी। योजना का उद्देश्य सिहाड़ा-जावर ब्लॉक के 26000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था।

कांग्रेस ने की एफआइआर की मांग
किसानों का आरोप है कि योजना का कार्य संपूर्ण रूप से नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों एवं इंजीनियरों की निगरानी में कंपनी और उसके पेटी कॉन्ट्रैक्टरों द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया गया। इसके चलते आज तक खेतों में पानी नहीं पहुंचा, जिससे क्षेत्र के किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह, रामपाल सिंह केहलारी, सुनील आर्य, अनिल जाधव, अश्विन बादल, चेतन सिंह चंदेल, आदित्य सिंह, निखलेश पालवी, संदीप सिहोरे, लक्की राजपूत, राहुल पटेल, शुभम सोलंकी, रविन्द्र सिंह मोर्य, सत्यजीत सिंह पुरनी, ऋषिराज डोडिया जावर ब्लाक के युवा कांग्रेस अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कांग्रेस ने मामले में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एफआइआर की मांग भी की।