– एनएच – 21 पर फ्लाइओवरों की भरमार, समाधान या नई उलझन- जयपुर–महुवा मार्ग पर 10 नए फ्लाइओवर स्वीकृत, 6 जगह पुराने पुलों के पास ही बनेंगे नए फ्लाईओवर
बस्सी. जयपुर – आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 21 ( एनएच-21) पर यातायात जाम और सड़क हादसों से निजात दिलाने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने जयपुर से महुवा तक 10 स्थानों पर नए फ्लाइओवर बनेंगे, लेकिन इन 10 में से छह स्थान ऐसे हैं, जहां पहले से ही फ्लाइओवर या आरओबी बने हुए हैं, जिनके पास नए फ्लाईओवर बनने से वाहनों को एक पुलिया पर चढ़ कर उतरते ही दूसरे फ्लाईओवर पर चढ़ कर उतरना पड़ेगा। इससे इन पुलियाओं पर लगातार दो चढ़ाई में वाहन हांफेंगे और उनका ईंधन भी अधिक खर्च होगा। अब इन्हीं पुराने फ्लाइओवरों के एक किलोमीटर के दायरे में नए फ्लाइओवर बनाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 19 साल पहले बनाए गए ये फ्लाइओवर सही स्थान पर नहीं बनने के कारण आज बेकार साबित हो रहे हैं। न तो इससे यातायात सुगम हुआ और न ही सड़क दुर्घटनाओं पर कोई खास असर पड़ा। अब एनएचएआई ने पुराने इन फ्लाइओवरों के पास ही नए फ्लाइओवर बनाने का निर्णय लिया है, ताकि चौराहों, कट्स और रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से राहत मिल सके।
इन स्थानों पर पहले से बने हैं फ्लाइओवर::::
कानोता, बस्सी के मोहनपुरा, दौसा, सिकंदरा, मानपुर और मेहंदीपुर बालाजी में पहले से फ्लाइओवर या रेलवे ओवरब्रिज बने हुए हैं। लेकिन इनका निर्माण उन स्थानों पर नहीं हुआ, जहां वास्तविक रूप से यातायात दबाव अधिक रहता है। नतीजतन वाहन चालकों को आज भी चौराहों पर रुकना पड़ता है, जिससे जाम और हादसों की आशंका बनी रहती है।
एनएचएआई के अनुसार इन स्थानों पर अब नए फ्लाइओवर ऐसे बिंदुओं पर बनाए जाएंगे, जहां से मुख्य ट्रैफिक निर्बाध निकल सके। हालांकि इसके चलते वाहन चालकों को एक नहीं, बल्कि दो-दो फ्लाइओवरों पर चढ़ना और उतरना पड़ेगा।
ईंधन और समय दोनों की बढ़ेगी खपत:::::
नए फ्लाइओवर बनने से जहां एक ओर जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर वाहन चालकों की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। खासकर भारी वाहनों को एक फ्लाइओवर से उतरते ही तुरंत दूसरे फ्लाइओवर पर चढ़ना पड़ेगा। इससे ईंधन की खपत बढ़ेगी और समय भी अधिक लगेगा। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ट्रकों और बसों को लगातार चढ़ाई-उतराई करनी पड़ेगी, जिससे वाहनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। वहीं छोटे वाहन चालकों के लिए भी बार-बार गति कम करना और बढ़ाना परेशानी का कारण बनेगा।
यहां-यहां प्रस्तावित हैं नए फ्लाइओवर:::
एनएचएआई की योजना के अनुसार जयपुर–महुवा तक कानोता, बस्सी चक, बांसखोह फाटक, जीरोता मोड़, दौसा कलक्ट्रेट क्षेत्र में दो फ्लाइओवर, सिकंदरा, मानपुर और मेहंदीपुर बालाजी में नए फ्लाइओवर बनाए जाएंगे। इसके अलावा महुवा से भरतपुर के बीच भी कई स्थानों पर फ्लाइओवर निर्माण की योजना है।
19 साल पुरानी भूल की कीमत
एनएच-21 पर जिन छह स्थानों पर पहले फ्लाइओवर बने थे, वे करीब 19 साल पहले बनाए गए थे। उस समय यातायात की स्थिति और भविष्य की जरूरतों का सही आकलन नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद इन फ्लाइओवरों से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। अब एक बार फिर करोड़ों की लागत से नए फ्लाइओवर बनाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि पहले ही सही स्थान पर निर्माण किया गया होता तो आज दोबारा खर्च की जरूरत ही नहीं पड़ती। (कासं )