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UGC बिल के कारण BJP के भीतर खुलकर असंतोष! नहीं रुक रहा इस्तीफे का दौर, इन नेताओं ने छोड़ी पार्टी

यूपी में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तीसरे दिन भी तेज रहा। एक तरफ छात्र सड़कों पर उतर आए, दूसरी तरफ सत्तारूढ़ BJP के भीतर असंतोष खुलकर सामने आए। कई जिलों में पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। वहीं, नेता सवालों पर असहज नजर आए।

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वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान BJP विधायक अवधेश सिंह UGC नियमों के सवालों से बचते दिखे। उन्होंने कहा कि हमें नए नियमों की जानकारी नहीं है, आप लोग ही बता दीजिए। इसके बाद उन्होंने विपक्ष पर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया और प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी।

इधर, BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने नए नियमों में संशोधन की मांग की है। उन्होंने बताया कि डॉ. महेश शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई है।

मऊ में 20 कार्यकर्ताओं का इस्तीफा

मऊ में बुधवार देर शाम BJP के पांच बूथ अध्यक्षों समेत 20 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया। सदर विधानसभा क्षेत्र के सेक्टर संख्या 356 के सेक्टर अध्यक्ष राम सिंह के साथ सेक्टर के चार बूथ अध्यक्ष और 14 अन्य कार्यकर्ताओं ने भी सामूहिक रूप से पद छोड़ दिया।

राम सिंह ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि मौजूदा समय में पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटकती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शीर्ष नेतृत्व UGC के नियमों में संशोधन कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, जिसे वे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते।

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे सनातन को बांटने वाला बिल बताते हुए सवर्ण, पिछड़े और दलित समाज से एकजुट होकर विरोध की अपील की। उधर, ‘यूपी में बाबा…’ फेम कवियित्री अनामिका जैन अंबर ने इस बिल पर कहा कि ऐसा न हो कि सवर्ण होना अपराध हो जाए।

इन जिलों में विरोध तेज

लखनऊ, देवरिया, मेरठ, गाजियाबाद और पीलीभीत में छात्रों का विरोध और तेज हो गया। कहीं मुंडन, कहीं काली पट्टी, तो कहीं कफन और जंजीरों के साथ प्रदर्शन हुआ। देवरिया और मेरठ में पुलिस से नोकझोंक भी देखने को मिली।

UGC ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026’ नोटिफाई किया था। सरकार इसे कैंपस में निष्पक्षता का कदम बता रही है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों को शक की नजर से देखा जाएगा और सामाजिक तनाव बढ़ेगा।

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