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दूल्हा बनेंगे बाबा विश्वनाथ, सारंगनाथ मंदिर से आई हल्दी, शुरू हुई विवाह की रस्में

Mahashivratri celebration : बाबा विश्वनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। शुक्रवार को काशी में हल्दी की रस्म अदा की गई।

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वाराणसी

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Avaneesh Kumar Mishra

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Vijendra Mishra

Feb 13, 2026

काशी में मनाई गई बाबा विश्वनाथ की हल्दी की रस्म, PC- Patrika

वाराणसी : बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में हल्दी की रस्म अदा की गई। बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे इस दौरान महिलाओं ने मंगल गीत भी गए।

महाशिवरात्रि को लेकर बाबा विश्वनाथ की नगरी में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की हल्दी की रस्म अदा की गई। हल्दी लेकर पहुंचे पूर्व महंत परिवार के सदस्यों ने बाबा विश्वनाथ को रुद्राक्ष माला और अंग वस्त्र भी भेंट किया। इस दौरान टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत के पुत्र वचस्पति तिवारी के आवास पर बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की अचल प्रतिमा पर हल्दी कि रस्म की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। हजारों की संख्या में पहुंची महिलाओं ने यहां विवाह के गीत भी गए।

खास बात यह है कि बाबा विश्वनाथ के ससुराल सारंगनाथ मंदिर से भगवान शिव और माता पार्वती को हल्दी भेजी गई थी और इस परंपरा का निर्वहन पिछले कई सौ सालों से किया जा रहा है। बाबा विश्वनाथ 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) को दूल्हा बनेंगे और उनके दूल्हा बनने से पहले ढोलक और मंजीरे के जरिए बाबा की वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामना भी दी गई।

धार्मिक परंपरा के अनुसार आज से ही बाबा विश्वनाथ के विवाह की परंपरा शुरू होती है और सनातन धर्म के अनुसार बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाने के बाद ही उनके शादी की रस्म निभाई जाती है।

शुक्रवार को बाबा के हल्दी की रस्म अदा किए जाने के बाद 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद 27 फरवरी को बाबा विश्वनाथ की अचल प्रतिमा महंत आवास से बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक मां गौरा के गौना को लेकर भेजी जाएगी। पूरी कशी को इस दिन का साल भर से इंतजार रहता है और भक्त बाबा के इस विवाह को लेकर काफी उत्साहित नजर आते हैं।

बाबा विश्वनाथ के इस गौना को लोग रंगभरी एकादशी के रूप में मनाते हैं और परंपरा है कि इस दिन से ही काशी में होली की शुरुआत होती है।