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राजस्थान बजट: इन अधूरे वादों ने तोड़ा उदयपुरवासियों का दिल, बड़ी परियोजनाओं पर क्यों रही चुप्पी? जानें जनता का दर्द

Rajasthan Budget: राजस्थान बजट से उदयपुरवासियों को इस बार बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन कई अधूरे वादों और बड़ी परियोजनाओं पर चुप्पी ने लोगों को निराश कर दिया। शहर के विकास, ट्रैफिक समाधान और पर्यटन से जुड़ी योजनाओं का जिक्र न होने से जनता में नाराजगी है।

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Rajasthan Budget 2026 Sparks Anger in Udaipur Unfinished Promises and Silence on Mega Projects Upset

शहरवासियों ने बजट देखकर अपनी राय बताई (फोटो- पत्रिका)

Rajasthan Budget 2026: उदयपुर के लिए साल 2026-27 का बजट मिलाजुला रहा। प्रतापनगर-बलीचा मार्ग में आयड़ नदी पर स्थित टू-लेन पुल को फोरलेन करेंगे। भुवाणा चौराहे से अंबेरी फ्लाइओवर सड़क सुदृढ़ीकरण के लिए 38.50 करोड़ की घोषणा की गई है।

साथ ही स्टेट हाइवे-32 की क्रॉसिंग पर अंडरब्रिज बनेगा, जिस पर 41 करोड़ रुपए खर्च होंगे। गोगुंदा क्षेत्र में बनास और साबरमती नदी पर सुगम आवागमन के लिए विभिन्न पुलिया का 10 करोड़ की लागत से निर्माण किया जाएगा। ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में खेरवाड़ा में कनबई भोमटावर से झांझरी (गुजरात सीमा) तक 10 किमी सड़क के लिए 10 करोड़ और वल्लभनगर के डबोक में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 से टांक तक सड़क के लिए 8 करोड़ का प्रावधान किया गया।

शहरी विकास को गति, लेकिन पर्यटन में आस अधूरी

राज्य बजट में उदयपुर शहर के लिए कुछ अहम प्रावधान हैं। बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों को प्राथमिकता दी है, लेकिन पर्यटन शहर होने से कई अन्य अहम जरूरतें अधूरी हैं। कुछ ठोस घोषणाएं जरूर हुई हैं, लेकिन पर्यटन नगरी की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप व्यापक दृष्टिकोण की अभी भी अपेक्षा बनी हुई है।

राज्य बजट से उदयपुर को क्या-क्या मिला?

बजट में भुवाणा चौराहे से अंबेरी सड़क के सुधार कार्य, प्रतापनगर से बलीचा के बीच दो पुलिया को टू-लेन से फोर लेन करने का प्रावधान, फतहसागर रिंग रोड के सुग्रहिकरण है। एमबी अस्पताल में कैंसर सेंटर का प्रस्ताव है। राज्य अभिलेखागार भवन, सेंट्रल जेल निर्माण और विद्युत लाइनों को भूमिगत करने का भी प्रावधान है। ये घोषणाएं शहर की दीर्घकालिक जरूरतों से जुड़ी हैं।

बजट से शहरवासी कितने लाभान्वित होंगे?

राज्य बजट में उदयपुर के लिए की गई घोषणा के अनुसार सड़क और पुलियाओं के चौड़ीकरण से प्रतिदिन आने-जाने वाले नागरिकों को राहत मिलेगी। कैंसर सेंटर की स्थापना से गंभीर रोगियों को जयपुर या अन्य बड़े शहरों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी। विद्युत लाइनों के भूमिगत होने से दुर्घटनाओं और अवरोधों में कमी आएगी। हालांकि, शहर का दायरा बढ़ने के कारण यूडीए और नगर निगम क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के लिए और अधिक बजट की आवश्यकता बनी रहेगी।

सड़क सुधार और पुलिया चौड़ीकरण से यातायात दबाव कम होगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों को सहारा मिलेगा। फतहसागर रिंग रोड के सुग्रहिकरण से शहर की छवि और सुगमता बेहतर होगी। कैंसर सेंटर का प्रस्ताव संभागीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। विद्युत लाइनों को भूमिगत करने से सौंदर्याकरण होगा और आपूर्ति सुरक्षित होगी। अप्रत्यक्ष लाभ व्यापार, पर्यटन और नागरिक सुविधाओं को मिलेगा।

कौन सी उम्मीदें इस बजट में रह गई अधूरी?

उदयपुर पर्यटन सिटी है। पर्यटन दबाव को देखते हुए सड़कों का विस्तार, पार्किंग समुचित व्यवस्था, प्रमुख स्थलों का समग्र विकास और यातायात प्रबंधन के लिए अलग प्रावधान की अपेक्षा थी, जो बजट में स्पष्ट रूप से नहीं दिखी। साथ ही, पिछले बजट में घोषित फतेहपुरा चौराहे पर एलिवेटेड रोड व आयुर्वेद चौराहे से रामपुरा तक एलिवेटेड रोड की घोषणाएं लागू नहीं हो पाई है।

पर्ची सरकार का बजट हर बार की तरह इस बार भी कागजों का पुलिंदा है। हर वर्ग को उम्मीद थी, लेकिन निराशा में ही तब्दील हो गई। निवेश प्रोत्साहन के नाम पर सिर्फ प्रचार किया है, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं है। कृषि आय में बढ़ोतरी के लिए ठोस योजना नहीं है। कुल मिलकर पर्ची सरकार का बजट दिशाहीन व जनविरोधी है।
-फतह सिंह राठौड़

गरीब किसानों, श्रमिकों, ग्रामीणों का विरोधी बजट है। दिशाहीन और सारहीन बजट है। ग्रामीण क्षेत्र और दूरगामी परिणाम को लेकर जो होना चाहिए, वैसा बजट नहीं है। जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बजट है। यह बजट पूरी तरह से आंकड़ों का मायाजाल मात्र है। इससे जनता भ्रम में है।
-मांगीलाल गरासिया, पूर्व मंत्री

महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के लिए बजट निराशाजनक है। खासतौर से उदयपुर जैसे विश्वप्रसिद्ध और पर्यटन स्थल को नजरअंदाज किया गया। इससे आमजन में गहरी निराशा है। उदयपुर के दृष्टिकोण से भी देखा जाए तो ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है, जो सीधा जनता को फायदा पहुंचाए।
-हितांशी शर्मा, कांग्रेस नेत्री

पर्यटन, कला, सांस्कृतिक और धरोहर को बचाने पर खास ध्यान दिया गया। पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी बजट में प्रावधान किया गया है। लुप्त होती कलाएं, लोक और संस्कृति के प्रति सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। कहीं न कहीं साहित्य अछूता रह गया। उदयपुर के लिए खास नहीं, लेकिन मिलाजुला बजट है।
-रीना मेनारिया, शिक्षाविद्

यह बजट युवाओं को रोजगार नहीं देता, किसानों को राहत नहीं देता, महंगाई से परेशान आम आदमी को सहारा नहीं देता। केवल घोषणाओं का ढोल पीटा गया है, लेकिन धरातल पर काम का भरोसा नहीं देता है।
-रघुवीर सिंह मीणा, पूर्व मंत्री व देहात अध्यक्ष, कांग्रेस