उदयपुर, May 22, 2026

पेट्रोल पंप की तस्वीर (फोटो-पत्रिका)
Petrol Diesel Price Hike: उदयपुर। राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और कई क्षेत्रों में समय-समय पर सामने आ रही आपूर्ति बाधाओं का असर अब सीधे आमजन की जिंदगी, किसानों की लागत और व्यापारिक गतिविधियों पर दिखाई देने लगा है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसके कारण खाद्यान्न, सब्जियां, दूध, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं महंगी हो रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 15 मई, 19 मई , 23 मई और 25 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद राजस्थान में महंगाई का दबाव और तेज हो गया है।
परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि बढ़ती डीजल कीमतों से ट्रकों और मालवाहक वाहनों का संचालन महंगा हो गया है, जिसका असर सीधे बाजार तक पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। किसानों का कहना है कि डीजल महंगा होने से सिंचाई, ट्रैक्टर संचालन, फसल परिवहन और कृषि उपकरणों के खर्च में बढ़ोतरी हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से थोक और खुदरा बाजार दोनों प्रभावित होते हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि माल भाड़ा बढ़ने के कारण छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ रही है, जबकि उपभोक्ताओं को महंगे सामान खरीदने पड़ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने पर राज्य सरकार का वैट संग्रह भी स्वतः बढ़ जाता है। वर्तमान में राजस्थान में पेट्रोल पर लगभग 29.04 प्रतिशत और डीजल पर करीब 17.30 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है।
शहर में एक वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक डीजल भरने के मामले के बाद उदयपुर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने आमजन के लिए जागरूकता संदेश जारी किया है।
एसोसिएशन के सचिव राजराजेश्वर जैन ने बताया कि पेट्रोलियम पदार्थ तापमान के अनुसार फैलते और सिकुड़ते हैं। सुरक्षा कारणों से किसी भी टैंक को उसकी कुल क्षमता से 10 से 15 प्रतिशत कम भरा जाना तकनीकी रूप से जरूरी होता है।
उन्होंने बताया कि वाहन कंपनियां सर्विस मैन्युअल में जो क्षमता लिखती है, वह सलाह के रूप में होती है, न कि टैंक की अंतिम भराव क्षमता। कई बार वाहन चालक टंकी फुल कराने के दौरान वाहन हिलाकर नली तक ईंधन भरवा लेते हैं, जिससे निर्धारित क्षमता से अधिक ईंधन दिखाई देता है।
Updated on: 25 May 2026 04:44 pm

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