उदयपुर, Jun 02, 2026

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उदयपुर। राजस्थान में अब ऊंची इमारतों के निर्माण का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया। राज्य सरकार ने मॉडल भवन विनियमों (मॉडल बिल्डिंग बायलॉज) में बड़ा बदलाव करते हुए भवनों की ऊंचाई पर वर्षों से लागू प्रतिबंधों को हटा दिया है। अब किसी शहर में उपलब्ध फायर लेडर (अग्निशमन सीढ़ी) की ऊंचाई ही भवन स्वीकृति का अंतिम आधार नहीं होगी। किसी भवन में निर्धारित अग्निशमन सुरक्षा प्रावधान, आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम और अन्य तकनीकी मानकों की पूर्ण पालना की गई है तो उसे अधिक ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति मिल सकेगी। शहरी विकास एवं आवास विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सहमति बन गई है।
जल्द ही इसके आदेश जारी हो सकते हैं। सरकार के इस फैसले को प्रदेश के रियल एस्टेट, आवासीय और व्यावसायिक निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से डेवलपर्स और निवेशक भवन ऊंचाई से जुड़े प्रतिबंधों को सरल करने की मांग कर रहे थे। नए संशोधनों के बाद अब जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, कोटा सहित प्रदेश के अन्य शहरों में भी बड़े हाईराइज प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी।
राजस्थान में अब तक भवन निर्माण की स्वीकृति काफी हद तक अग्निशमन विभाग की उपलब्ध फायर लेडर क्षमता पर निर्भर थी। जिस शहर में जितनी ऊंचाई तक फायर लेडर पहुंच सकती थी, सामान्य रूप से उसी सीमा तक भवनों को मंजूरी दी जाती थी। इससे जयपुर में लगभग 70 मीटर तथा उदयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में करीब 60 मीटर तक ऊंचाई वाले भवनों की स्वीकृति संभव थी।
इससे अधिक ऊंचाई वाले प्रोजेक्ट्स के सामने कानूनी और तकनीकी बाधाएं खड़ी हो जाती थी। 20 जनवरी 2020 के बाद लागू प्रावधानों और फायर एनओसी व्यवस्था ने भी भवन ऊंचाई संबंधी सीमाओं पर रोक लग गई थी। कई बड़े निवेश, प्रोजेक्ट और आधुनिक हाईराइज परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
राज्य सरकार ने मॉडल भवन विनियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भवन की ऊंचाई निर्धारित करने का आधार केवल फायर लेडर नहीं होगा। अब भवन की वास्तविक अग्निशमन सुरक्षा क्षमता, सड़क की चौड़ाई, भूखंड का आकार, भवन डिजाइन और अन्य तकनीकी मापदंडों को भी महत्व दिया जाएगा।
यदि किसी भवन में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), राष्ट्रीय मानकों और निर्धारित अग्निशमन सुरक्षा नियमों के अनुरूप सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो उसे अधिक ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी। इसके तहत स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक मैनेजमेंट, फायर एस्केप, आपातकालीन निकास, जल भंडारण व्यवस्था और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
राज्य सरकार ने 14 सितंबर 2023 को जारी आदेश की भावना के अनुरूप मॉडल भवन विनियमों में संशोधन लागू किया है। यह निर्णय केंद्र सरकार की कम्प्लायंस रिडक्शन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के अनुरूप माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य निर्माण स्वीकृतियों में लगने वाले समय को कम करना, अनावश्यक नियमों को सरल बनाना और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ रियल एस्टेट और शहरी विकास क्षेत्र को मिलेगा। प्रदेश के बड़े शहरों में भूमि की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। ऐसे में ऊंची इमारतों का निर्माण ही बढ़ती आबादी और व्यावसायिक जरूरतों का व्यावहारिक समाधान हो सकेगा।
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई राज्यों में पहले से ही सड़क चौड़ाई, भूखंड क्षेत्रफल और फायर सेफ्टी मानकों के आधार पर ऊंची इमारतों को स्वीकृति दी जा रही है। राजस्थान में फायर लेडर आधारित प्रतिबंधों के कारण कई मामलों में विकास की गति प्रभावित हो रही थी। अब नए नियम लागू होने के बाद प्रदेश के शहर भी महानगरों जैसे विकसित शहरी मॉडलों की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे, जहां भवन ऊंचाई का निर्धारण आधुनिक सुरक्षा मानकों और तकनीकी मापदंडों के आधार पर किया जाता है।
Updated on: 02 Jun 2026 02:50 pm

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