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Bisalpur Dam: राजस्थान के बीसलपुर बांध से आई बड़ी खबर, ‘गायब’ हो गई 20 हजार बीघा सिंचित भूमि, जानिए कैसे

बीसलपुर बांध परियोजना की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही से टोंक शहर के आसपास हजारों बीघा सिंचित भूमि कॉलोनियों में बदल गई।

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टोंक

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Rakesh Mishra

Jan 24, 2026

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शहर के समीप सिंचित कृषि क्षेत्र। फोटो- पत्रिका

टोंक। बीसलपुर बांध परियोजना के अधिकारियों की अनदेखी से शहर के आस-पास 20 हजार बीघा सिंचित भूमि कम हो गई। इसका कारण है कि बीसलपुर बांध परियोजना ने 18 फरवरी 2026 को राजस्थान उपनिवेशन की अधिसूचना की अनदेखी कर दी।

इसके चलते बीसलपुर सिंचाई परियोजना, खाद्य सुरक्षा एक्ट तथा भूमि अधिग्रहण के आदेश की अनदेखी की गई। यह सब राजस्व और नगर निकाय की लापरवाही से भी हुआ। इन क्षेत्रों में 50 कॉलोनिया कट गई। ऐसे में ईसरदा बांध डूब क्षेत्र में भी सिंचाई परियोजना की जमीन प्रभावित होगी।

इन इलाकों में खेत बन गए आबादी

सूत्रों के मुताबिक सवाईमाधोपुर चौराहा से तारण तक 50 कॉलोनियां आदेश के बावजूद राजस्व विभाग और नगर परिषद की अनदेखी के चलते खेतों में ही काट दी गई। ऐसा ही डाइट रोड, बमोर रोड पर हुआ है। यहां पहले बीसलपुर बांध की नहरों से फसलों में सिंचाई होती थी। अभी भी इन इलाकों से नहर गुजर रही है, लेकिन नगर परिषद ने भूमाफिया पर मेहरबानी बरतते हुए आदेशों को देखा तक नहीं और यह खेत अब कॉलोनियों में बदल गए।

एनओसी तक नहीं मांगी

राजस्थान उपनिवेशन ने 18 फरवरी 2026 को ही अधिसूचना जारी कर दी थी कि सिंचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाए। ना ही सरकार के किसी प्रोजेक्ट को लागू किया जाए। ऐसा करने पर पहले बीसलपुर बांध परियोजना से एनओसी लेनी पड़ेगी, लेकिन नगर परिषद ने इन क्षेत्रों में कॉलोनी काटते समय एनओसी तक नहीं ली।

नहीं दिया कभी ध्यान

जिला मुख्यालय पर नहरी तंत्र के समीप अवैध कॉलोनियों का निर्माण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर परिषद और राजस्व विभाग ने नहरी तंत्र के पास इन कॉलोनियों के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया। नहरी तंत्र के पास कॉलोनियों का निर्माण सिंचाई तंत्र के साथ छेड़छाड़ कर सकता है, जिससे खाद्य आपूर्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विभागों की इस अनदेखी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।

नियमों की अनदेखी

नियमों की पालना में लापरवाही भी उजागर हो रही है। राजस्व विभाग और नगर परिषद की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नहरी तंत्र और सिंचाई तंत्र की स्थिति और भी खराब होती जा रही है। जिले के किसानों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया है।

यह वीडियो भी देखें

एक्ट का खुला उल्लंघन

नहरों से सिंचित कृषि भूमि का भू-परिवर्तन नहीं किया जा सकता, जबकि जिला मुख्यालय पर सवाईमाधोपुर चौराहा से तारण, डाइट रोड तथा बमोर रोड पर हजारों बीघा जमीन अब कॉलोनियों में बदल गई। इन सिंचित क्षेत्र को अब फिर से विकसित करना होगा। राजस्व विभाग ने भी रजिस्ट्री करते समय एक्ट को नहीं देखा। भू-रूपांतरण के समय नगर परिषद ने भी अनदेखी बरती।

  • रामेश्वर प्रसाद चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष, युवा किसान महापंचायत

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