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चूरू जिले के मिस्त्री ने रचा इतिहास, बनाई ऐसी मशीन जिससे विदेश पर निर्भरता होगी खत्म

इतना ही नहीं, ईश्वरराम जांगिड़ ने हैलीकॉप्टर का चेसिस भी तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अनुमति दे, तो वे दो व्यक्तियों के बैठने योग्य हैलीकॉप्टर को उड़ा सकते हैं।

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तारानगर. बुचावास गांव के तीसरी पास ईश्वररामजांगिड़ ने हैंडीक्राफ्ट उद्योग के लिए एक ऐसी सालचूल मशीन तैयार की है, जो अब तक केवल विदेशों से ही मंगवाई जाती थी। इस नई मशीन के आने से उद्योगपतियों को तीन गुना अधिक पैसे देकर मशीन आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

लागत में भारी बचत

विदेशों से मशीन आयात करने में 12 लाख से 16 लाख रुपए खर्च होते थे, जबकि ईश्वररामजांगिड़ की बनाई मशीन मात्र 5.5 लाख रुपए में उपलब्ध है। इससे छोटे और बड़े दोनों प्रकार के उद्योगों को फायदा मिलेगा। ईश्वररामजांगिड़ (62) पहले भी चूरू, जयपुर और जोधपुर में रहते हुए साइनिंग, रिप्सा, पेनल, शो और कटर जैसी मशीनें बना चुके हैं। उनका कहना है कि विदेशों से मशीन मंगवाने के कारण देश का पैसा बाहर चला जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है। उनका प्रयास भारत की मुद्रा को विदेश में जाने से रोकना है।

हैलीकॉप्टर और सौर ऊर्जा प्लेट का विकास

इतना ही नहीं, ईश्वरराम जांगिड़ ने हैलीकॉप्टर का चेसिस भी तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अनुमति दे, तो वे दो व्यक्तियों के बैठने योग्य हैलीकॉप्टर को उड़ा सकते हैं। इसके अलावा, वे एक ऐसी प्लेट भी तैयार कर रहे हैं जो सूर्य और हवा से चार्ज होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का सहयोग मिलने पर वे और भी नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।