
माउंट आबू (फोटो-पत्रिका)
सिरेाही /माउंट आबू @ पत्रिका। प्राचीन काल से ऋषि मुनियों की तपस्यास्थली रहा प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन व विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल माउंट आबू अब फिर से आबूराज के नाम से पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में नाम परिवर्तन की घोषणा की।
सरकार की घोषणा के साथ ही जिलेवासियों की वर्षों से चली आ रही मांग पूरी होने से साधु-संतों व जिलेवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। साधु-संतों से लेकर जिलेवासी लंबे समय से माउंट आबू का नाम फिर से आबूराज करने की मांग कर रहे थे, जो अब जाकर पूरी हुई है।
मुख्यमंत्री के सदन में घोषणा करने के साथ ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। माउंट आबू में लोग एक-दूसरे को बधाइयां देते नजर आए। देखते ही देखते लोग खुशी में झूमते हुए अटल चौक पर पहुंच गए। जहां मिठाइयां बांटकर और आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
इतिहासकारों के अनुसार माउंट आबू का नाम पूर्व में आबूराज ही हुआ करता था। जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने बदल कर माउंट आबू कर दिया। तब से यह माउंट आबू के नाम से ही जाना जाता रहा है। स्कन्द पुराण में भी आबू पर्वत का नाम आबूराज ही दर्ज है। जो कि सप्त ऋषियों की तपोस्थली रही है।
यहां के अधिकांश पर्यटन स्थल भी धार्मिक हैं। जिसमें अर्बुदा माता शक्ति पीठ, गुरु शिखर दत्तात्रेय भगवान, अचलेश्वर महादेव, वशिष्ठ आश्रम, ब्रह्माकुमारीज, देलवाडा आदि प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। जहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गर्मियों के दिनों में हजारों श्रद्धालु गोवर्धन की तर्ज पर आबूराज की परिक्रमा करते हैं। 33 कोटि देवी-देवताओं के वास की मान्यता वाले इस स्थान को पहाड़ों की तलहटी में बसे सभी ग्रामीण प्रणाम कर अपने दैनिक कार्य आरंभ करते हैं। माउंट आबू का नाम जो कि अंग्रेजी में है, उसे बदलकर आबूराज किए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही थी।
माउंट आबू का नाम आबूराज करने की मांग को लेकर गत 13 जून 2025 को साधु-संतों के नेतृत्व में 16 गांवों, 53 संगठनों व सेवा समितियों के पदाधिकारियों ने हस्ताक्षरित ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम एक विशाल जुलूस निकालकर उपखंड अधिकारी को दिया था।
माउंट आबू को आबू राज का नाम देने के लिए सांसद लुंबाराम चौधरी, राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व विधायक समाराम गरासिया ने भी अलग-अलग मंचों से लेकर मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर मांग उठाई थी। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में माउंट आबू को आबूराज करने की घोषणा की। साथ ही कामा को कामवन व जहाजपुर का नाम यज्ञपुर नाम कर दिया है।
इतिहासकार उदय सिंह डिंगार के अनुसार माउंट आबू का प्राचीन नाम अर्बुदारण्य, अर्बुदांचल और अर्बुद पर्वत बताया जाता है। जो कालांतर में आबूराज व आबूपर्वत कहलाया। सन 1823 ईस्वी में सिरोही स्टेट के साथ अंग्रेजों की हुई सहायक संधि के बाद आबूपर्वत का कुछ भाग अंग्रेजों को दिया गया। इसके बाद 1845 ईस्वी में अंग्रेजों ने माउंट आबू ठंडा स्थान होने से ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर सेनेटोरियम बनाया और इसका नाम माउंट आबू कर दिया।
तब से पर्यटन स्थल माउंट आबू के नाम से जाना जाता रहा है। तभी से राजस्थान के राज्यपालों के ग्रीष्मकालीन प्रवास की परंपरा चली आ रही है। यहां का राजभवन भी इसी का प्रतीक है। अब सरकार ने इसका वहीं प्राचीन नाम आबूराज कर दिया, जो कि खुशी की बात है।
मैंने 11 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर धार्मिक स्थल माउंट आबू का नामकरण पुन: आबू राज तीर्थ करने व खुले में मांस मदिरा के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। यह धार्मिक स्थल पुरातन काल से ऋषि मुनियों की तपस्या स्थली रही है। यहां ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। अंग्रेजों ने आबूराज का नाम माउंट आबू कर दिया था, जो अब सरकार ने फिर से आबू राज तीर्थ नाम कर दिया है। यह खुशी की बात है।
मैंने 18 जनवरी 2026 को धार्मिक स्थल माउंट आबू का नाम परिवर्तन कर आबूराज करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निवेदन किया था। यह सनातन धर्म की आस्था का केंद्र है। क्षेत्र के आदिवासी समाज के लोग आज भी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए नक्की झील में वैशाख पूर्णिमा को अस्थि विसर्जन करने जैसे धार्मिक कार्यों को संपादित करते हैं। विभिन्न समाजों के धार्मिक कार्यों व आध्यात्मिक यात्राओं के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है।
Updated on:
28 Feb 2026 02:49 pm
Published on:
27 Feb 2026 10:20 pm
बड़ी खबरें
View Allसिरोही
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
