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Rajasthan Politics : जब गले मिले डोटासरा और राठौड़, मंच पर ठहाकों के बीच चले सियासी बाण, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

एक कार्यक्रम के दौरान इन दोनों नेताओं की 'केमिस्ट्री' ने हर किसी को हैरान कर दिया। सदन के भीतर 'आंकड़े' गिनाने वाले ये नेता यहाँ एक-दूसरे को 'किस्से' सुनाते और ठहाके लगाते नजर आए।

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सीकर

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Nakul Devarshi

Feb 09, 2026

rajendra rathore dotasra

सीकर। राजस्थान की राजनीति के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी—भाजपा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा—जब एक ही मंच पर हों, तो चर्चा होना लाजिमी है। 8 फरवरी 2026 को सीकर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन दोनों नेताओं की 'केमिस्ट्री' ने हर किसी को हैरान कर दिया। सदन के भीतर 'आंकड़े' गिनाने वाले ये नेता यहाँ एक-दूसरे को 'किस्से' सुनाते और ठहाके लगाते नजर आए।

शेखावाटी के दो दिग्गज: पुरानी अदावत और नई मुस्कुराहट

राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा, दोनों ही शेखावाटी की राजनीति के धुरी माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव से लेकर सदन की कार्यवाही तक, दोनों के बीच अक्सर तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है। लेकिन रविवार को सीकर में नज़ारा बिल्कुल अलग था।

जैसे ही दोनों नेता मिले, उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया और काफी देर तक गुफ्तगू करते रहे। इन तस्वीरों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई कि "राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता।"

मंच पर 'तंज' और 'ठहाके': शब्दों की बाजीगरी

मंच पर जब संबोधन की बारी आई, तो दोनों ने अपनी चिर-परिचित शैली में एक-दूसरे पर चुटीले तंज भी कसे।

  • डोटासरा का अंदाज़: गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने ठेठ राजस्थानी लहजे में राठौड़ की चुटकी लेते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं कि पूरा पंडाल ठहाकों से गूँज उठा।
  • राठौड़ का जवाब: राजेंद्र राठौड़, जो अपनी हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने भी डोटासरा के वार को मुस्कुराहट के साथ झेला और पलटवार में ऐसी 'गूगली' डाली कि डोटासरा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

राजनीति में 'शिष्टाचार' की मिसाल

यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान दौर की राजनीति में जहाँ व्यक्तिगत हमले बढ़ रहे हैं, वहीं राजस्थान के ये दो कद्दावर नेता एक स्वस्थ परंपरा की मिसाल पेश करते दिखे। जानकारों का कहना है कि राजस्थान की राजनीति की यही खूबसूरती है कि यहाँ विचारधारा की लड़ाई मंच से नीचे उतरते ही व्यक्तिगत सम्मान में बदल जाती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा: "ये रिश्ता क्या कहलाता है?"

जैसे ही इन दोनों नेताओं के गले मिलने और हंसने की तस्वीरें वायरल हुईं, राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया। कुछ लोग इसे आगामी निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव से पहले की 'रणनीतिक शांति' बता रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक शिष्टाचार भेंट मान रहे हैं। हालांकि, समर्थकों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या पर्दे के पीछे भी कोई नई खिचड़ी पक रही है?

जब 'नाथ' और 'राठौड़' की जोड़ी ने लूटी महफिल

कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि डोटासरा और राठौड़ की मौजूदगी ने कार्यक्रम में जान फूँक दी। दोनों नेताओं ने साबित किया कि वे मंझे हुए राजनेता हैं जो जानते हैं कि कब तलवारें चलानी हैं और कब गले मिलना है। मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने के बावजूद, दोनों के बीच का आपसी सम्मान साफ झलक रहा था।