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जमीनी हकीकत: सरकार से हर साल लेते हैं दो करोड़ से ज्यादा अनुदान फिर भी सुविधाओं का टोटा

सीकर. गोवंश की सेवाओं का दावा करने वाली शहर की सबसे बड़ी गोपीनाथ गोशाला और नंदीशाला का पशुपालन विभाग की ओर से औचक निरीक्षण में व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई। निरीक्षण के दौरान गोवंश को तेज सर्दी से बचाने के लिए सभी जगह तिरपाल और पर्दे नहीं मिले। गोवंश के रहने वाले स्थानों पर गोबरयुक्त कीचड़ मिला। गोशाला में आने वाले गोवंश की आने और जाने की सही एंट्री नहीं मिली। गोवंश के बाड़े में सफाई व्यवस्था चौपट मिली।

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सीकर. गोवंश की सेवाओं का दावा करने वाली शहर की सबसे बड़ी गोपीनाथ गोशाला और नंदीशाला का पशुपालन विभाग की ओर से औचक निरीक्षण में व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई। निरीक्षण के दौरान गोवंश को तेज सर्दी से बचाने के लिए सभी जगह तिरपाल और पर्दे नहीं मिले। गोवंश के रहने वाले स्थानों पर गोबरयुक्त कीचड़ मिला। गोशाला में आने वाले गोवंश की आने और जाने की सही एंट्री नहीं मिली। गोवंश के बाड़े में सफाई व्यवस्था चौपट मिली। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. राजेन्द्र कृष्ण काला और डॉ. दिनेश नेहरा की अगुवाई में टीम ने जब रेकार्ड और गोशाला को दूध बेचने से होने वाली आय संबंधी जानकारी मांगी तो कर्मचारियों ने रेकार्ड गुम होना बताया। टीम को गोशाला की आय की जानकारी मांगी गई। अधिकारियों ने गोशाला प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि तीन दिन में चारा, सफाई और रिकॉर्ड व्यवस्था में सुधार किया जाए। निर्धारित समय सीमा में व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं तो गोशाला को मिलने वाला अनुदान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा।

ये भी दिए निर्देश

गोवंश को शीतलहर से बचाव के लिए तिरपाल व पर्दों की व्यवस्था करने, नियमित रूप से गोबर व कीचड़ की सफाई करके मिट्टी या सूखा बेङ्क्षडग मटेरियल डाला जाए। मृत गोवंश का नमक डालकर गड्ढे में वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना सुनिश्चित करें।

अव्यवस्थाएं मिली हैं

शहर में गोपीनाथ गोशाला और नंदीशाला का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोवंश के लिए की गई व्यवस्थाएं सही नहीं मिली। प्रबंधन को तीन दिन में अव्यवस्थाएं दूर कर विभाग में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर अनुदान रोक लिया जाएगा।

डॉ. राजेंद्र कृष्ण काला संयुक्त निदेशक पशुपालन, सीकर

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